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चुनाव आयोग के खिलाफ TMC की याचिका पर SC ने हस्तक्षेप करने से किया इनकार, कहा- ऐसी सोच ठीक नहीं

Ram Mandir SC Hearing

Ram Mandir SC Hearing

नेशनल डेस्क: चुनाव आयोग से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने TMC की याचिका पर हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि इस मामले में फिलहाल दखल देने की जरूरत नहीं है।

यह याचिका ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की ओर से दाखिल की गई थी। पार्टी ने चुनाव आयोग के उस फैसले पर सवाल उठाया था, जिसमें वोटों की गिनती के दौरान पर्यवेक्षकों के रूप में केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSU) के कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान किया गया था।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की उस दलील को गलत बताया, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के कर्मचारी उनके खिलाफ पक्षपात कर सकते हैं। कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसी सोच ठीक नहीं है और सरकारी कर्मचारियों पर भरोसा होना चाहिए।

टीएमसी की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा। उन्होंने चुनाव आयोग के एक सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि इसमें खुद विसंगतियों की आशंका जताई गई है और केंद्र सरकार के एक अतिरिक्त प्रतिनिधि की मांग की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इससे राज्य सरकार पर संदेह नहीं जताया जा रहा?

इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता कि कोई अधिकारी केंद्र सरकार का है या नहीं। यह फैसला चुनाव आयोग के विवेक पर निर्भर करता है। उन्होंने यह भी बताया कि मतगणना के दौरान कई स्तर के अधिकारी मौजूद रहते हैं, जैसे काउंटिंग एजेंट, काउंटिंग सुपरवाइजर और माइक्रो ऑब्जर्वर, जिससे पूरी प्रक्रिया पर नजर बनी रहती है।

जस्टिस बागची ने आगे कहा कि यह नहीं माना जा सकता कि चुनाव आयोग की अधिसूचना नियमों के खिलाफ है। अगर कुछ अधिकारी केंद्र सरकार से आते हैं और बाकी अलग-अलग स्रोतों से तो इसे गलत नहीं कहा जा सकता।

दरअसल, यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट के एक फैसले से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने पहले ही टीएमसी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें वोटों की गिनती के दौरान केवल केंद्र और PSU कर्मचारियों की तैनाती को चुनौती दी गई थी। इसी फैसले के खिलाफ टीएमसी सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी, लेकिन वहां भी उसे राहत नहीं मिली।

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