नई दिल्ली : इस्पात क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को पूर्ण करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय इस्पात और नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने भारत में हरित इस्पात के लिए इकोसिस्टम को सक्षम बनाने के लिए समर्पित 13 कार्यबलों में से 5 के साथ सार्थक विचार-विमर्श किया। इस वार्तालाप में इस क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों, उद्योग विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों ने भागीदारी करते हुए इस्पात उत्पादन में स्थिरता और इसे कार्बन मुक्त बनाने के भारत के दृष्टिकोण के प्रति अपनी पूर्ण प्रतिबद्धता जताई। बैठक में इस्पात मंत्रालय के सचिव, कार्यबलों के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
केंद्रीय इस्पात मंत्री की अध्यक्षता में हुई चर्चा में, नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास, प्रोत्साहन और डीकार्बोनाइजेशन के संभावित विकल्पों सहित बहु-आयामी दृष्टिकोण के माध्यम से इन अपरिहार्य चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रारूप तैयार करने पर भी चर्चा की गई। बैठक के दौरान इस दिशा में मंत्री महोदय के महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और दृष्टिकोण से कार्य बलों द्वारा प्रस्तुत अंतिम सिफारिशों को कार्यान्वित करने में सहायता मिलेगी। वार्तालाप के दौरान इस्पात उद्योग के विविध परिदृश्यों पर विचार करने वाले डीकार्बोनाइजेशन समाधानों के साथ-साथ नीतिगत उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया, जिसमें एकीकृत इस्पात संयंत्र और माध्यमिक सुविधाएं दोनों शामिल हैं।
भारतीय बैंक संघ के मुख्य कार्यकारी सुनील मेहता के नेतृत्व में वित्त मामले में टास्क फोर्स ने भारतीय इस्पात उद्योग के डीकार्बोनाइजिंग के लिए वित्तपोषण विकल्पों पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विद्युत मंत्रालय और एमएनआरई के वरिष्ठ अनिरुद्ध कुमार के नेतृत्व में नवीकरणीय ऊर्जा पारेषण कार्य बल ने इस्पात उद्योग में नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण की समीक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने हेतु प्रोत्साहन और उद्योगों को कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा सुविधाएं स्थापित करने जैसे उपायों को अपनाने के लिए नीति चालकों का भी प्रस्ताव रखा।
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