Last Updated: September 24, 2026

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राजनीतिक जगत में शोक की लहरः पूर्व केंद्रीय मंत्री व इस पार्टी के सीनियर नेता का हुआ निधन

March 3, 2026

राजनीतिक जगत में शोक की लहरः पूर्व केंद्रीय मंत्री व इस पार्टी के सीनियर नेता का हुआ निधन

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केपी उन्नीकृष्णन का आज कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वे काफी समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन से केरल की राजनीति में शोक की लहर है। केपी उन्नीकृष्णन पिछले कुछ समय से उम्र से जुड़ी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उन्हें कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया।

 

केरल की राजनीति का बड़ा चेहरा थे
केपी उन्नीकृष्णन को केरल की राजनीति में एक मजबूत और विचारधारा वाले नेता के रूप में जाना जाता था। वे केवल राजनीति करने वाले नेता नहीं थे, बल्कि विचारों और सिद्धांतों पर खुलकर बोलने वाले व्यक्ति थे। उनका मानना था कि संसद केवल संख्या बल का मंच नहीं, बल्कि विचारों की अभिव्यक्ति का स्थान है। वे समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे और लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे। राष्ट्रीय मोर्चा सरकार के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री के रूप में भी काम किया। आपातकाल के समय वे तानाशाही के खिलाफ खुलकर बोलने वालों में शामिल थे। उनकी राजनीतिक यात्रा आज़ादी के बाद भारत में हुए वैचारिक बदलावों को दर्शाती है।

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने जताया दुख
केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan ने केपी उन्नीकृष्णन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्नीकृष्णन का जाना राज्य और देश की राजनीति के लिए बड़ी क्षति है। मुख्यमंत्री ने उन्हें एक सिद्धांतों पर चलने वाला नेता बताया।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत
केपी उन्नीकृष्णन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत सोशलिस्ट पार्टी से की थी। बाद में वे 1960 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। 1962 में वे कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने। यहीं से राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका शुरू हुई।

कई बार रहे सांसद
1971 में वे केरल के वडाकारा क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए। इसके बाद उन्होंने 1977, 1980, 1984, 1989 और 1991 में भी इसी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे कई बार सांसद रहे और अपने क्षेत्र में मजबूत जनाधार बनाया। उनकी लोकप्रियता केवल पार्टी तक सीमित नहीं थी, बल्कि अलग-अलग विचारों के लोग भी उनका सम्मान करते थे।

एक युग का अंत
केपी उन्नीकृष्णन के निधन के साथ केरल ने उस पीढ़ी के एक महत्वपूर्ण नेता को खो दिया है, जो राजनीति को सिद्धांतों और मूल्यों के साथ जोड़कर देखते थे। उनका जीवन और कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

 

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