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कौन हैं नौशेरा की ‘शेरनी’ सिमरन बाला, LoC पर हुई परवरिश; रिपब्लिक डे परेड में पुरुषों की CRPF यूनिट की संभालेंगी कमान

Simran Bala CRPF unit copy

नेशनल डेस्क। भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटा जम्मू-कश्मीर का जिला राजौरी हमेशा से संवेदनशील माना जाता है। इसी जिले के सीमावर्ती गांव नौशहरा में पली-बढ़ी सिमरन बाला ने बचपन से ही गोलियों की आवाज, सीमा पार की साजिशें और सुरक्षाबलों की बहादुरी को बहुत करीब से देखा है। इन हालातों ने उनके मन में बचपन से ही देशभक्ति और देशसेवा का जज्बा भर दिया।

 

बचपन से ही देश सेवा का सपना
नौशहरा गांव अक्सर पाकिस्तान की ओर से होने वाली अकारण गोलीबारी और आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों का सामना करता रहा है। ऐसे माहौल में सिमरन ने यह ठान लिया था कि वह बड़ी होकर देश की रक्षा करेंगी और वर्दी पहनकर देश की सेवा करेंगी।

 

परिवार पहले से ही देशसेवा से जुड़ा है
सिमरन बाला का परिवार पहले से ही देशसेवा से जुड़ा रहा है। उनके दादा तीर्थ राम चौधरी भारतीय सेना की आर्मी सप्लाई कोर में सूबेदार थे उनके पिता विनोद कुमार जम्मू-कश्मीर लाइट इन्फैंट्री (JKLI) से हवलदार पद से सेवानिवृत्त हुए इस तरह सिमरन अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जिन्होंने वर्दी पहनकर देश की सेवा का रास्ता चुना।

गणतंत्र दिवस परेड में ऐतिहासिक जिम्मेदारी
सिमरन बाला आज केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सहायक कमांडेंट हैं। इस वर्ष वे दिल्ली के कर्तव्य पथ पर होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में एक नया इतिहास रचने जा रही हैं। यह पहली बार होगा जब कोई महिला अधिकारी CRPF के 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी की कमान संभालेगी। यह उपलब्धि न केवल सिमरन के लिए, बल्कि देश की लाखों बेटियों के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

 

कठिन प्रशिक्षण में दिखाया शानदार नेतृत्व
परेड की तैयारियों के दौरान सिमरन ने बेहतरीन अनुशासन, मजबूत नेतृत्व क्षमता, पेशेवर दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। कठिन ड्रिल और लगातार अभ्यास में उनके काम को देखकर वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी।

 

पढ़ाई की शुरुआत सीमावर्ती गांव से
सिमरन की शुरुआती शिक्षा भी संघर्षों से भरी रही। 10वीं तक की पढ़ाई नौशहरा के न्यू नेशनल पब्लिक स्कूल से की। इसके बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए जम्मू चली गईं। 12वीं जम्मू के नागबनी स्कूल से पूरी की। ग्रेजुएशन गांधीनगर स्थित महिला कॉलेज से किया।

2021 में ग्रेजुएशन, फिर बड़ी सफलता
सिमरन ने 2021 में ग्रेजुएशन पूरी की। इसके बाद उन्होंने भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) में अधिकारी बनने के लिए परीक्षाएं दीं। कड़ी मेहनत के बाद उनका चयन CRPF अधिकारी के रूप में हो गया।

 

CAPF परीक्षा में जम्मू-कश्मीर की एकमात्र महिला
मई 2023 में सिमरन ने CAPF परीक्षा पास की, और उस वर्ष जम्मू-कश्मीर से सफल होने वाली एकमात्र महिला उम्मीदवार बनीं। यह उपलब्धि उनके आत्मविश्वास और मेहनत का बड़ा प्रमाण है।

 

परिवार को बेटी पर गर्व
सिमरन के पिता विनोद कुमार कहते हैं कि उन्हें अपनी बेटी पर बहुत गर्व है। उन्होंने बताया कि सिमरन बचपन से ही बेल्ट फोर्स में जाना चाहती थी और उसने अपने सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत की। वहीं, उनके भाई रजनीश चौधरी का कहना है कि सिमरन आज पूरे देश की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं। अब बेटियां भी देश की सुरक्षा में आगे बढ़ रही हैं।

 

देश की बेटियों के लिए मिसाल बनी सिमरन
नौशहरा में रहने वाले सिमरन के परिवार में माता-पिता के साथ बहन और भाई हैं। आज पूरा परिवार और जम्मू-कश्मीर के लोग सिमरन की इस उपलब्धि से खुश और गौरवान्वित हैं। सीमा के साए में पली-बढ़ी सिमरन बाला आज देश की शान बन चुकी हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि अगर हौसले मजबूत हों, तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकता।

 

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