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Bijapur Encounter: बीजापुर मुठभेड़ में 6 माओवादी ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद

Bijapur Encounter

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नेशनल डेस्क। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में रविवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में 6 माओवादी कैडरों के शव बरामद हुए हैं। माओवादियों के पास से सुरक्षाबलों ने दो एके-47, एक इंसास, दो .303 राइफल और एक कार्बाइन के साथ 6 ग्रेडेड हथियार बरामद किए हैं।

जानकारी के अनुसार मुठभेड़ में मारे गए माओवादियों में 4 महिला माओवादी कैडर भी शामिल हैं। आसपास के क्षेत्र में सघन सर्चिंग अभियान सतत रूप से जारी है। बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि जिले के नेशनल पार्क क्षेत्र में शनिवार से जारी सर्च ऑपरेशन की निरंतरता में शनिवार को भी क्षेत्र में माओवादियों एवं सुरक्षा बलों के बीच कई बार मुठभेड़ हुई।

उल्लेखनीय है कि बीजापुर जिले के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के जंगल-पहाड़ी इलाकों में माओवादियों की नेशनल पार्क एरिया कमेटी के डीवीसीएम दिलीप बेड़जा एवं अन्य सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी की सूचना के आधार पर डीआरजी/कोबरा/एसटीएफ की संयुक्त टीम द्वारा सर्च ऑपरेशन प्रारंभ किया गया।

सर्च अभियान के दौरान शनिवार से संयुक्त टीम एवं माओवादियों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग जारी है। सर्च ऑपरेशन के दौरान मुठभेड़ स्थल से शुक्रवार को दोपहर तक दो माओवादी कैडरों के शव बरामद किए गए। इसके बाद शाम के समय माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में दो और माओवादी कैडरों के शव भी बरामद किए गए।

सर्च ऑपरेशन की निरंतरता के क्रम में रविवार को माओवादियों एवं सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ के पश्चात सर्चिंग के दौरान दो और माओवादी कैडरों के शव बरामद किए गए हैं।

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि डीआरजी, कोबरा, एसटीएफ एवं समस्त स्थानीय पुलिस बल तथा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवान बस्तर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और जनकल्याण सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ पूर्ण निष्ठा एवं पेशेवर प्रतिबद्धता से अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं। वे स्थानीय जनता की सुरक्षा और क्षेत्र में स्थायी शांति की स्थापना के लिए सशस्त्र माओवादी कैडरों के विरुद्ध लगातार सटीक, समन्वित एवं निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं।

सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मरने वाले माओवादियों की पहचान डीवीसीएम दिलीप बेड़जा, एसीएम माड़वी कोसा, एसीएम लक्खी मड़काम और राधा मेट्टा के रूप में की गई है। हालांकि अभी दो माओवादियों की पहचान नहीं हो पाई है।

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