Last Updated: October 20, 2026

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‘समाजवाद ही राम राज्य’, अखिलेश यादव का BJP पर हमला; AI वीडियो में रावण दिखाने पर जताई नाराजगी

October 20, 2026

‘समाजवाद ही राम राज्य’, अखिलेश यादव का BJP पर हमला; AI वीडियो में रावण दिखाने पर जताई नाराजगी

लखनऊ: दशहरे के मौके पर समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दशहरा हमें बुराई के खिलाफ लड़ने और समाज में अच्छाई को बढ़ावा देने का संदेश देता है। इस दौरान उन्होंने समाजवाद और राम राज्य को एक-दूसरे से जुड़ा बताते हुए कहा कि सच्चे समाजवादी और राम राज्य में विश्वास करने वाले लोग ही वास्तविक अर्थों में सनातनी हैं।

अखिलेश यादव ने BJP की ओर से कथित तौर पर जारी किए गए एक AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) वीडियो पर भी नाराजगी जताई। इस वीडियो में उन्हें रावण के रूप में दिखाए जाने का दावा किया गया है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि तकनीक का इस्तेमाल समाज की भलाई के बजाय राजनीतिक विरोधियों की छवि खराब करने के लिए किया जा रहा है।

‘समाजवाद असल में राम राज्य’

दशहरे पर लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश यादव ने लोगों को त्योहार की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और यह पर्व सभी को गलत कामों के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने लोगों को राम राज्य का रास्ता दिखाया था। अखिलेश के मुताबिक, समाजवाद का उद्देश्य भी समाज में समानता, न्याय और लोगों की भलाई सुनिश्चित करना है। इसी विचार को सामने रखते हुए उन्होंने कहा, “समाजवाद असल में राम राज्य है और राम राज्य ही समाजवाद है।”

अखिलेश ने आगे कहा कि जो लोग इन मूल्यों में विश्वास करते हैं और समाज में अच्छाई लाने का प्रयास करते हैं, वे सच्चे सनातनी हैं। वहीं, उन्होंने गलत काम करने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा कि केवल धार्मिक पहचान का दावा करने से कोई व्यक्ति सच्चा सनातनी नहीं बन जाता। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे समाज की बुराइयों को दूर करने का संकल्प लें और इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश से करें।

AI वीडियो में रावण दिखाने पर BJP को घेरा

अखिलेश यादव ने BJP पर आरोप लगाया कि पार्टी ने दशहरे के मौके पर AI से तैयार एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्हें रावण के रूप में दिखाया गया। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल लोगों की मदद करने, शिक्षा को बेहतर बनाने और समाज के विकास के लिए किया जाना चाहिए।

उनका आरोप था कि BJP इस तकनीक का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने और उनके खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने के लिए कर रही है। अखिलेश ने कहा कि दशहरे जैसे त्योहार का संदेश बुराई को खत्म करना है, लेकिन राजनीतिक फायदे के लिए तकनीक का इस्तेमाल करना सही नहीं है। हालांकि, वीडियो के निर्माण और उसे जारी करने से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

उत्तर प्रदेश में AI वीडियो को लेकर बढ़ा राजनीतिक विवाद

उत्तर प्रदेश की राजनीति में AI से तैयार वीडियो और डिजिटल प्रचार को लेकर समाजवादी पार्टी और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। अखिलेश यादव ने पहले भी आरोप लगाया था कि कुछ तत्व उन्हें और उनकी पत्नी तथा सांसद डिंपल यादव को निशाना बना रहे हैं। समाजवादी पार्टी की ओर से भी AI से तैयार वीडियो के जरिए BJP नेताओं पर निशाना साधा गया है। अखिलेश यादव ने पहले कुछ ऐसे वीडियो दिखाए थे, जिनमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर व्यंग्यात्मक और विवादित चित्रण किए जाने का दावा किया गया।

इनमें से एक कथित वीडियो में मुख्यमंत्री को प्रशासनिक कमियों को स्वीकार करते हुए दिखाया गया, जबकि दूसरे वीडियो में उन्हें चिलम पीते हुए दिखाने का दावा किया गया। इस चित्रण को लेकर BJP ने आपत्ति जताई थी और समाजवादी पार्टी पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया था।

एक अन्य कथित AI वीडियो में भगवान श्रीराम को अयोध्या छोड़ते हुए दिखाया गया था। यह वीडियो राम मंदिर से जुड़े कथित विवाद और दान में गड़बड़ी के आरोपों के संदर्भ में चर्चा में आया। BJP ने इन चित्रणों की आलोचना करते हुए समाजवादी पार्टी पर सनातन परंपराओं का अपमान करने का आरोप लगाया। इन विवादों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में राजनीतिक दलों के बीच सोशल मीडिया और AI से तैयार सामग्री को लेकर टकराव बढ़ रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर डिजिटल माध्यमों का गलत इस्तेमाल करने के आरोप लगा रहे हैं।

चुनावी राजनीति में AI की भूमिका पर सवाल

AI तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने राजनीतिक प्रचार के नए तरीके सामने लाए हैं। वीडियो और तस्वीरों को डिजिटल तरीके से बदलकर किसी नेता की छवि पेश की जा सकती है। ऐसी सामग्री व्यंग्य, प्रचार या आलोचना के लिए इस्तेमाल हो सकती है, लेकिन अगर इसे वास्तविक घटना के रूप में पेश किया जाए, तो लोगों के बीच भ्रम भी फैल सकता है।

अखिलेश यादव के बयान ने एक बार फिर राजनीतिक प्रचार में AI के इस्तेमाल और उसकी सीमाओं पर बहस को सामने ला दिया है। इस पूरे विवाद में दोनों दलों के आरोपों और जवाबों को अलग-अलग समझना जरूरी है। साथ ही, AI से तैयार वीडियो की प्रामाणिकता की जांच किए बिना उन्हें वास्तविक घटना मानना उचित नहीं होगा।

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