Site icon Dainik Savera Times

सोनम वांगचुक बोले- मैं गांधी नहीं, खुद बनें अपने नायक

NSA revoked against Sonam Wangchuk

NSA revoked against Sonam Wangchuk

Sonam said – I am not Gandhi : नई दिल्ली। लद्दाख के शिक्षाविद् और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने देशवासियों को आत्मनिर्भर नेतृत्व का संदेश देते हुए कहा कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े नेता के इंतजार से नहीं, बल्कि खुद जिम्मेदारी उठाने से होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह न तो आधुनिक गांधी हैं और न ही कोई नायक, बल्कि एक सामान्य नागरिक हैं जो अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। लोगों से उन्होंने अपने जीवन का नायक स्वयं बनने और समाज के लिए आगे आने का आह्वान किया।

नायक नहीं, जिम्मेदार नागरिक हूं : वांगचुक

वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। शनिवार को उनकी भूख हड़ताल का 14वां दिन रहा, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का धरना 22वें दिन में प्रवेश कर गया। मुझे गांधी या नायक मत कहिए शुक्रवार रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक वीडियो संदेश में वांगचुक ने कहा कि लोगों की ओर से उन्हें 21वीं सदी का गांधी या नायक कहे जाने वाली टिप्पणियां उन्हें असहज करती हैं।

वांगचुक बोले : जिम्मेदार नागरिक बनें

उन्होंने कहा कि मैं न गांधी हूं और न कोई नायक। मैं सिर्फ एक सामान्य नागरिक हूं, जिसने अपनी जिम्मेदारियां निभाने की कोशिश की है। कृपया किसी और में नायक मत तलाशिए। अपने जीवन के नायक स्वयं बनिए और एक जिम्मेदार नागरिक की तरह अपना कर्तव्य निभाइए। आंदोलन से जुड़े संगठन द्वारा साझा किए गए स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से सोनम वांगचुक का वजन लगभग 7.5 किलोग्राम कम हो चुका है। उनका रक्तचाप 106/74 एमएम एचजी दर्ज किया गया है।

कमजोरी हो रही, संकल्प कायम : वांगचुक

वांगचुक ने बताया कि अब उन्हें पहले जैसी ऊर्जा महसूस नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन बेहतर महसूस होता है और कुछ दिन कमजोरी अधिक महसूस होती है, लेकिन वह आंदोलन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। वांगचुक ने कथित परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामलों में छात्रों के आत्महत्या किए जाने की घटनाओं का उल्लेख करते हुए लोगों से मूकदर्शक बने रहने के बजाय आंदोलन का हिस्सा बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पीड़ित छात्र किसी का अपना परिवार होता, तो लोग जरूर आवाज उठाते। इसलिए इंतजार करने के बजाय अभी आगे आकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

20 जुलाई को संसद मार्च की अपील

सोनम वांगचुक ने लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल होने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो लोग दिल्ली नहीं आ सकते, वे अपने-अपने शहरों में शांतिपूर्ण तरीके से उपवास या विरोध दर्ज कराकर अपनी आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा – आपको हमारी तरह कई दिनों तक भूखा रहने की जरूरत नहीं है। भोजन करके आइए, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में 20 जुलाई को हमारे साथ जरूर जुड़िए।

ये हैं आंदोलन की मुख्य मांगें

कॉजपा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। संगठन का आरोप है कि परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के कारण कई छात्रों को नुकसान हुआ है। साथ ही संगठन ने ऐसे मामलों में आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग भी की है। यह आंदोलन 20 जून से जारी है, जबकि सोनम वांगचुक 28 जून को इसमें शामिल हुए और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

Also Read :

Exit mobile version