नई दिल्लीः केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के समर्थक सोनम वांगचुक ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस फैसले को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताया और कहा कि यह देशभर के छात्रों, युवाओं और आम लोगों के शांतिपूर्ण संघर्ष का परिणाम है।
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते हैं और लगातार अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते हैं, तो लोकतंत्र में उसका असर जरूर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि यह जीत किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे देश के जागरूक नागरिकों की है।
IT’S A VICTORY OF DEMOCRACY
direct democracy… straight from the streets.
It’s a victory of peace, patience & persévérance.
Congratulations CJP, Gen Z of the nation and thank you all citizens for shedding fear and the fear of fear and rising up from every corner of the nation.… pic.twitter.com/rSLOfvba2R— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 25, 2026
शांतिपूर्ण आंदोलन और धैर्य की सराहना
अपने संदेश में वांगचुक ने कहा कि यह सफलता उन हजारों छात्रों और युवाओं की है, जिन्होंने बिना हिंसा का रास्ता अपनाए लगातार आंदोलन किया। उन्होंने कहा कि शांति, धैर्य और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखना ही किसी भी मजबूत लोकतंत्र की पहचान होती है।
उन्होंने लिखा कि यह सीधे जनता की आवाज की जीत है, जो सड़कों से निकलकर सरकार तक पहुंची। उनका कहना था कि जब लोग एकजुट होकर सही मुद्दों पर आवाज उठाते हैं, तो बदलाव संभव होता है।
छात्रों और CJP को दी बधाई
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) और देशभर के Gen Z छात्रों को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि इन युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अपने अधिकारों की मांग को लगातार मजबूती से उठाया। उन्होंने उन सभी छात्रों की सराहना की जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग जारी रखी।
आंदोलन का समर्थन करने वालों का जताया आभार
वांगचुक ने उन नागरिकों का भी धन्यवाद किया जिन्होंने आंदोलन का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि कई लोगों ने बिना किसी डर के छात्रों के साथ अपनी एकजुटता दिखाई और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग का समर्थन किया। उनके अनुसार, किसी भी लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी और जागरूकता बहुत महत्वपूर्ण होती है और इस आंदोलन ने यही साबित किया है।
अब सुधारों पर काम करने की जरूरत
अपने संदेश के अंत में सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अब असली जरूरत शिक्षा व्यवस्था में बड़े और ठोस सुधार करने की है। उन्होंने सरकार से मांग की कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए, पेपर लीक जैसी घटनाओं को पूरी तरह रोका जाए और छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उनका कहना था कि केवल जिम्मेदारी तय करना काफी नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए मजबूत व्यवस्था बनानी होगी।
NEET-UG विवाद के बीच आया इस्तीफा
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में विवाद और छात्रों का आंदोलन लगातार चर्चा में रहा। परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों ने कई जगह प्रदर्शन किए और जवाबदेही की मांग उठाई।
इसी पृष्ठभूमि में सोनम वांगचुक का यह बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे लंबे समय से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और व्यापक सुधारों की मांग करते रहे हैं। उनका मानना है कि यह अवसर केवल एक इस्तीफे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे शिक्षा प्रणाली में सकारात्मक बदलाव लाने की शुरुआत बनाया जाना चाहिए।

