नई दिल्लीः पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। पिछले कई दिनों से उनका इलाज चल रहा था। अस्पताल से बाहर आने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया और अपनी सेहत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अब उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है। वे फिर से खाना खा रहे हैं और उनके शरीर में धीरे-धीरे ताकत वापस आ रही है।
घर जाने से पहले राजघाट जाएंगे
वीडियो में सोनम वांगचुक ने कहा कि अस्पताल से निकलने के बाद वे सीधे घर नहीं जाएंगे। सबसे पहले वे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के लिए राजघाट जाएंगे। उन्होंने कहा कि जब वे स्विट्जरलैंड से भारत लौटे थे और जंतर-मंतर पर अपना अनशन शुरू करने वाले थे, तब भी उन्होंने सबसे पहले राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की थी। अब आंदोलन खत्म होने के बाद भी वे उसी परंपरा को निभाते हुए राजघाट जाएंगे।
अस्पताल से डिस्चार्ज हुए सोनम वांगचुक, राजघाट जाकर देंगे श्रद्धांजलि
सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है. उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे और उसके बाद वापस पहाड़ों की ओर लौटेंगे. उन्होंने मेडांटा अस्पताल,… pic.twitter.com/FDN9mjg91K
— zingabad (@zingabad) July 27, 2026
लोगों का दिल से किया धन्यवाद
सोनम वांगचुक ने अपने संदेश में सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि देशभर के लोगों ने उनके आंदोलन का समर्थन किया और उनकी आवाज को मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि सभी लोगों ने मिलकर इस आंदोलन को सफल बनाया। इसके लिए उन्होंने सभी समर्थकों को दिल से धन्यवाद दिया और सभी को सलाम करते हुए “जय हिंद” कहा।
28 जून से शुरू हुआ था अनशन
सोनम वांगचुक 28 जून को छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे। इसके बाद उन्होंने जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की। उनका यह अनशन लगातार 26 दिनों तक चला। लंबे समय तक कुछ न खाने की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद 18 जुलाई को उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में हिरासत जैसा महसूस होने का लगाया आरोप
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान सोनम वांगचुक ने कहा था कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है जैसे उन्हें अस्पताल में इलाज के लिए नहीं, बल्कि हिरासत में रखा गया हो। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत के आदेश के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल से मेदांता अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनका इलाज जारी रहा। इलाज के बाद उनकी हालत में सुधार हुआ और अब उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई है।
36 दिनों तक चला छात्रों का आंदोलन
पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का प्रदर्शन कुल 36 दिनों तक चला। इस आंदोलन का नेतृत्व कॉकरोच जनता पार्टी कर रही थी। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्तीफा दें। उनका कहना था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार किए जाएं।
आंदोलन के दौरान लगातार प्रदर्शन और मांगों के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद सरकार ने शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को सौंप दी। मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्रों ने अपना 36 दिनों से चल रहा आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी।

