Last Updated: September 26, 2026

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सोनम वांगचुक का अनशन जारी: परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सरकार पर उठाए कई गंभीर सवाल

July 14, 2026

सोनम वांगचुक का अनशन जारी: परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सरकार पर उठाए कई गंभीर सवाल

नई दिल्लीः शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 17 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। यह आंदोलन नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर किया जा रहा है।

CJP ने इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। आंदोलन 20 जून से शुरू हुआ था, जबकि सोनम वांगचुक 28 जून को इसमें शामिल हुए। तब से वे लगातार अनशन कर रहे हैं और सरकार से शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की मांग कर रहे हैं।

“देश में ईमानदारी की कीमत कम होती जा रही है”
सोनम वांगचुक का कहना है कि आज देश में ईमानदारी की अहमियत कम हो गई है। उनके अनुसार, हर क्षेत्र में बेईमानी बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि परीक्षा के पेपर लीक होने से लेकर वोट खरीदने तक कई गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं। उनका मानना है कि यदि ऐसी स्थिति जारी रही तो देश की शिक्षा व्यवस्था और लोकतंत्र दोनों कमजोर होंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए कहा कि सरकार को लोगों की आवाज सुननी चाहिए और संवेदनशील होकर फैसले लेने चाहिए।

क्या केवल एक मंत्री के इस्तीफे से समस्या हल हो जाएगी?
इस सवाल के जवाब में सोनम वांगचुक ने कहा कि सिर्फ एक व्यक्ति के इस्तीफे से पूरी समस्या खत्म नहीं होगी। लेकिन इससे जवाबदेही तय करने की शुरुआत जरूर होगी। उनका कहना है कि जब तक किसी को अपनी गलती के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाएगा, तब तक ऐसी घटनाएं बार-बार होती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि यह केवल शिक्षा व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है। अगर परीक्षा में नकल या पेपर लीक के जरिए छात्र डॉक्टर और इंजीनियर बनेंगे, तो भविष्य में इसका नुकसान पूरे देश को उठाना पड़ेगा। ऐसे डॉक्टर लोगों के इलाज में और ऐसे इंजीनियर इमारतों के निर्माण में गंभीर गलतियां कर सकते हैं, जिससे लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।

क्या सरकार ने अब तक कोई संपर्क किया है?
सोनम वांगचुक ने बताया कि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से उनसे सीधे या किसी अन्य माध्यम से कोई बातचीत नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि अब वे अपनी आवाज और अधिक लोगों तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे ताकि सरकार इस मुद्दे की गंभीरता को समझे। उनके अनुसार, यदि सरकार इस पर ध्यान नहीं देती तो इसकी जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि उन लोगों की भी होगी जो इस मुद्दे को पर्याप्त समर्थन नहीं दे पाए।

लोगों के समर्थन को बताया सबसे जरूरी
जब उनसे पूछा गया कि अगर धीरे-धीरे लोग आंदोलन से दूर हो गए तो क्या होगा, इस पर उन्होंने कहा कि यदि बड़ी संख्या में लोग घरों से बाहर निकलकर अपनी आवाज उठाएं, तो सरकार को बातचीत करनी ही पड़ेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार पूरी तरह असंवेदनशील नहीं है और यदि जनता का दबाव बढ़ता है तो एक-दो दिनों के भीतर समाधान निकालने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं।

बातचीत हुई तो किन मुद्दों पर होगी चर्चा
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार उन्हें बातचीत के लिए बुलाती है, तो केवल इस्तीफे की मांग ही मुद्दा नहीं होगी। उनका कहना है कि असली जरूरत शिक्षा व्यवस्था में लंबे समय के सुधारों की है। उन्होंने सुझाव दिया कि संसद के मानसून सत्र में परीक्षा प्रणाली और शिक्षा सुधार पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए। साथ ही सरकार को छात्रों, शिक्षाविदों और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी इस प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए, ताकि भविष्य के लिए मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था तैयार की जा सके।

CJP से जुड़ने से पहले क्या था कोई डर
इस सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्होंने CJP के लोगों के बारे में पहले पूरी जानकारी जुटाई और उनसे बातचीत भी की। इसके बाद ही उन्होंने आंदोलन में शामिल होने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं लगा कि आंदोलन से जुड़े लोग किसी निजी लाभ के लिए काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाना और छात्रों के हितों की रक्षा करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए क्या है संदेश
सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश देते हुए कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए जनता की बात सुनना सबसे महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि सरकार को अड़ियल रवैया छोड़कर संवेदनशीलता और सहानुभूति के साथ लोगों की समस्याओं को समझना चाहिए। लोकतंत्र कठोरता से नहीं, बल्कि संवाद, करुणा और विश्वास से मजबूत होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कभी व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई है, लेकिन वे यही कहना चाहते हैं कि यदि सरकार जनता की बात सुनेगी तो इससे देश और सरकार दोनों को लंबे समय तक फायदा मिलेगा।

 

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