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सोनम वांगचुक की पत्नी ने खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, याचिका दायर कर की रिहाई की मांग

Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk

Sonam Wangchuk : लद्दाख क्षेत्र में राजनीतिक विवाद ने तूल पकड़ लिया है, जब प्रसिद्ध समाजसेवी और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक की पत्नी, गीतांजलि जे. आंगमो, ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर अपने पति की रिहाई की मांग की। उनका आरोप है कि वांगचुक की गिरफ्तारी गैरकानूनी और अपमानजनक है, और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से वांगचुक की तत्काल रिहाई की अपील की है।

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और आरोप
सोनम वांगचुक को लद्दाख में हुई हिंसा के बाद गिरफ्तार किया गया था। वांगचुक पर आरोप है कि वह पाकिस्तान से संपर्क रखने वाले और लद्दाख के लिए असंवैधानिक गतिविधियों में लिप्त हैं, लेकिन उनकी पत्नी इन आरोपों को सिरे से खारिज करती हैं। उनका कहना है कि यह आरोप पूरी तरह से झूठे और निराधार हैं। वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत जोधपुर जेल में बंद किया गया है, जो कि भारतीय कानून के तहत एक कठोरतम सुरक्षा कानून माना जाता है।

पत्नी का आरोप – झूठे आरोपों में फंसाया गया
गीतांजलि जे. आंगमो का कहना है कि उनके पति को राजनीतिक रंजिश का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि वांगचुक को लद्दाख के लोगों के हितों के लिए काम करने की सजा मिल रही है। गीतांजलि ने स्पष्ट रूप से कहा, “वांगचुक पाकिस्तान से किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं रखते। वह सिर्फ अपने क्षेत्र और समुदाय के लिए काम कर रहे थे।” उन्होंने अपने पति की रिहाई के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी हस्तक्षेप करने की अपील की है।

राष्ट्रपति को भेजा पत्र
गीतांजलि ने बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक तीन पृष्ठों का पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपनी चिंताएं और अपीलें साझा कीं। पत्र में उन्होंने कहा कि वांगचुक के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं और यह उन्हें बदनाम करने की साजिश का हिस्सा हो सकते हैं। उन्होंने लिखा, “मेरे पति ने हमेशा लोगों के कल्याण के लिए काम किया है, और अब उन्हें अपने ही देश में इस प्रकार के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। मुझे नहीं पता कि वह किस स्थिति में हैं, और यह मुझे बेहद परेशान करता है।”

लेह में हिंसा और वांगचुक की गिरफ्तारी
वांगचुक की गिरफ्तारी लेह शहर में 24 सितंबर को हुई हिंसक झड़पों के बाद हुई थी, जिनमें चार लोगों की मौत हो गई थी। यह हिंसा लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और क्षेत्र को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़की थी। 26 सितंबर को, वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया और जोधपुर जेल भेज दिया गया। उनके खिलाफ यह आरोप भी लगाया गया कि उन्होंने इस हिंसा को बढ़ावा दिया और लोगों को अस्थिरता की ओर धकेला।

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