यूपी डेस्क। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी पार्टी लाइन से हटकर काम करने वाले तीन विधायकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यह बड़ा कदम उठाया है। इस संबंध में पार्टी ने आधिकारिक बयान जारी किया है। सपा ने ये कार्रवाई उनकी जन विरोधी विचारधारा और पार्टी के मूल उद्देश्य से भटकने की वजह से की है।
वहीं, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया X पर लिखा कि समाजवादी सौहार्दपूर्ण सकारात्मक विचारधारा की राजनीति के विपरीत साम्प्रदायिक विभाजनकारी नकारात्मकता व किसान, महिला, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा और पीडीए विरोधी विचारधारा का साथ देने के कारण, समाजवादी पार्टी जनहित में विधायकों को पार्टी से निष्कासित करती है।
इन तीन विधायकों को निष्कासित किया गया
- अभय सिंह – गोशाईगंज से विधायक
- राकेश प्रताप सिंह – गौरीगंज से विधायक
- मनोज कुमार पांडेय – ऊंचाहार से विधायक
समाजवादी सौहार्दपूर्ण सकारात्मक विचारधारा की राजनीति के विपरीत साम्प्रदायिक विभाजनकारी नकारात्मकता व किसान, महिला, युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा और ‘पीडीए विरोधी’ विचारधारा का साथ देने के कारण, समाजवादी पार्टी जनहित में निम्नांकित विधायकों को पार्टी से निष्कासित करती है:
1. मा.…
— Samajwadi Party (@samajwadiparty) June 23, 2025
क्यों निकाला गया इन नेताओं को?
- सांप्रदायिक और समाज को बांटने वाली राजनीति का समर्थन किया
- किसान विरोधी, महिला विरोधी, युवा विरोधी और व्यापारी विरोधी नीतियों का साथ दिया
- पार्टी के मूल सिद्धांतों और विचारधारा के खिलाफ काम किया
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का मामला
इन तीनों विधायकों समेत कुल 7 विधायकों ने साल 2023 के राज्यसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ जाकर भाजपा के पक्ष में वोट दिया था। इस लिस्ट में शामिल हैं, जिनके नाम अभय सिंह, राकेश प्रताप सिंह, मनोज पांडेय, पूजा पाल, विनोद चतुर्वेदी, आशुतोष मौर्य व राकेश पांडेय शामिल थे।
क्रॉस वोटिंग की वजह से सपा को लगा था बड़ा झटका
सपा का तीसरा उम्मीदवार हार गया था। वहीं भाजपा के सभी 8 उम्मीदवार जीत गए थे। यह सपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक नुकसान था। बाद में, दो निष्कासित विधायक अभय सिंह व मनोज पांडेय ने भाजपा जॉइन कर ली थी।
सपा ने कहा- सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं
सपा ने साफ कहा है कि पार्टी अपनी विचारधारा से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल किसी भी सदस्य पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इन विधायकों को सुधरने का मौका दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसका फायदा नहीं उठाया। जिस कारण ये कदम उठाया गया।

