नेशनल डेस्क: भारत में इस्राइल के राजदूत रूवेन अजार ने अपने बयान में कहा कि इस्राइल और अमेरिका का ईरान पर हमला करने या उसकी जमीन पर सैन्य कब्जा करने का कोई इरादा नहीं है। दोनों देश चाहते हैं कि ईरान के अंदर हालात बेहतर हों और वहां की जनता खुद अपनी सरकार पर नीतियां बदलने के लिए दबाव बनाए।
रूवेन अजार ने कहा कि अगर ईरान के लोग चाहें तो वे अपने देश में नेतृत्व और नीतियों में बदलाव ला सकते हैं। उनका मानना है कि बाहर से सैन्य कार्रवाई करने के बजाय अगर बदलाव देश के अंदर से आए तो वह ज्यादा मजबूत और असरदार होता है। इससे ईरान के नागरिकों के जीवन में सुधार आ सकता है और क्षेत्र में शांति भी बढ़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता और शांति सभी देशों के लिए जरूरी है। अगर यह क्षेत्र शांत रहेगा तो इससे इस्राइल, खाड़ी देशों और दुनिया के बाकी हिस्सों को भी फायदा होगा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी चाहता है कि यह इलाका उन खतरों से मुक्त हो जो मौजूदा तनाव और टकराव की वजह से पैदा हो रहे हैं।
दरअसल, यह बयान ऐसे समय में आया है, जब इस्राइल और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। दोनों देश एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। इस्राइल का कहना है कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्र में सक्रिय हथियारबंद समूहों को समर्थन देकर अस्थिरता बढ़ा रहा है। वहीं ईरान इन आरोपों को खारिज करता है और कहता है कि उसका परमाणु और सैन्य कार्यक्रम केवल अपनी सुरक्षा के लिए है। ईरान का यह भी आरोप है कि अमेरिका और इस्राइल की नीतियां ही क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का कारण बन रही हैं।
पिछले कुछ वर्षों में इन दोनों देशों के बीच टकराव कई रूपों में सामने आया है। साइबर हमले, गुप्त सैन्य अभियान और आरोप-प्रत्यारोप लगातार होते रहे हैं। इस तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया दुनिया के तेल और गैस सप्लाई का एक बड़ा केंद्र है। हालांकि, भारत में इस्राइल के राजदूत के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल इस्राइल सीधे युद्ध के बजाय कूटनीतिक और राजनीतिक रास्ते से बदलाव की उम्मीद कर रहा है। उनका कहना है कि अगर ईरान के अंदर से सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है, तो इससे पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा मिल सकता है।

