
Sugar Price Hike Today: त्योहारों के सीज़न से पहले आम लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। चीनी की कीमत में पिछले कुछ दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। जो चीनी करीब 20 दिन पहले 45 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
लगातार बढ़ते दामों ने घरेलू बजट को लेकर चिंता बढ़ा दी है। खासकर ऐसे समय में जब त्योहार नजदीक हैं और मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है।
20 दिनों में करीब 20 रुपये महंगी हुई चीनी
20 अगस्त को चीनी का भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। यानी महज 20 दिनों के भीतर इसकी कीमत में लगभग 20 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है।
चीनी के इस अचानक बढ़े भाव को लेकर ग्राहक और कारोबारी दोनों असमंजस में हैं। खुदरा बाजार में कीमतों में तेजी का असर सीधे आम उपभोक्ताओं की जेब पर दिखाई दे रहा है।
त्योहारों से पहले मिठाई हो सकती है महंगी
रक्षाबंधन समेत त्योहारों का सीजन करीब है। ऐसे में चीनी की बढ़ी कीमत का सीधा असर मिठाई और चीनी से तैयार होने वाले दूसरे उत्पादों पर पड़ सकता है।
मिठाई बनाने में चीनी एक प्रमुख कच्चा माल है। इसके महंगे होने से मिठाई की लागत बढ़ सकती है और दुकानदार इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। नतीजतन आने वाले दिनों में मिठाइयों के दाम बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
घर के बजट पर भी पड़ेगा असर
चीनी की कीमत बढ़ने का असर सिर्फ मिठाई तक सीमित नहीं रहेगा। चाय-कॉफी से लेकर घर में बनने वाली मिठाई और अन्य व्यंजनों तक, रोजमर्रा की खपत में चीनी की बड़ी भूमिका है।
इसके अलावा बेकरी उत्पाद, बिस्किट और मीठे पेय बनाने वाली कंपनियों की लागत पर भी इसका असर पड़ सकता है। अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका दबाव घरेलू बजट के साथ-साथ खाद्य उत्पादों की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
सरकार ने स्टॉक लिमिट पर लिया फैसला
चीनी की कीमतों में तेजी और संभावित जमाखोरी को देखते हुए सरकार ने स्टॉक लिमिट को लेकर सख्ती की है। नए नियम के तहत व्यापारियों और कंपनियों को पहले के मुकाबले कम मात्रा में चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति होगी।
बताया गया है कि जिन कारोबारियों के पास पहले 30 दिनों तक का स्टॉक रखने की व्यवस्था थी, उन्हें अब 15 दिनों तक का स्टॉक रखने की सीमा में लाया जा रहा है।
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1 सितंबर से लागू होगा नया नियम
चीनी के स्टॉक से जुड़ी यह व्यवस्था 1 सितंबर से 30 नवंबर तक लागू रहने की बात कही गई है। सरकार का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक जमाखोरी पर रोक लगाना और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना है।
अब देखना होगा कि स्टॉक लिमिट लागू होने के बाद बाजार में चीनी की उपलब्धता और खुदरा कीमतों पर कितना असर पड़ता है।