करनाल। भारतीय राजनीति और आम जनता के बुनियादी मुद्दों पर किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब पारंपरिक राजनीतिक दलों से पूरी तरह निराश हो चुकी है।
सरकार को आड़े हाथों लिया चढ़ूनी ने
करनाल पहुंचे किसान नेता ने मौजूदा व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज की राजनीति लोकसेवा न रहकर पूरी तरह से एक व्यापार बन चुकी है। यहां पैसे से सत्ता और सत्ता से पैसा कमाने का खेल चल रहा है। इस व्यवस्था में आम आदमी के हिस्से में सिर्फ और सिर्फ संघर्ष ही बचा है। उन्होंने देश के मौजूदा हालात, आर्थिक संकट और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को घेरते हुए व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत पर जोर दिया।
कॉकरोच जनता पार्टी मुहिम का समर्थन
हाल ही में चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी नामक डिजिटल मुहिम का समर्थन करते हुए गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई वोटिंग में जनता ने उन्हें सबसे अधिक समर्थन दिया, जिसके बाद उन्हें इस मुहिम का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल यह एक ऑनलाइन मुहिम है और इसका अभी आधिकारिक पंजीकरण नहीं हुआ है। हालांकि, इसे मिल रहा समर्थन इस बात का संकेत है कि देश की जनता पारंपरिक राजनीति के विकल्प की तलाश कर रही है।
महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार को घेरा
चढूनी ने कहा कि यदि यह मुहिम आगे बढ़ती है तो इसे किसी एक राज्य तक सीमित रखने के बजाय पूरे देश में संगठन तैयार कर चुनावी मैदान में उतरना चाहिए। इसके लिए देशहित में सोचने वाले बुद्धिजीवियों और क्रांतिकारियों को एक मंच पर लाने की जरूरत है। किसान नेता ने देश की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और भुखमरी ने आम जनता की कमर तोड़ दी है।
शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल
उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों लोग दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि बड़े पूंजीपतियों के हजारों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश केवल पूंजीपतियों के हितों तक सीमित होकर रह गया है। चढूनी ने शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई कंप्यूटर शिक्षक अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुंचे थे, जो पिछले 15 वर्षों से मात्र 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर 12-12 घंटे काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे न्यूनतम मजदूरी नियमों का उल्लंघन बताया।
पाम ऑयल पर रोक लगाने की मांग
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्होंने कहा कि इलाज इतना महंगा हो चुका है कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उपचार कराना मुश्किल होता जा रहा है। आम लोगों की आय स्थिर है, लेकिन निजी अस्पतालों का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। नरेंद्र मोदी की पेट्रोल-डीजल और रसायनों के कम उपयोग संबंधी अपील पर प्रतिक्रिया देते हुए चढूनी ने कहा कि सरकार को देश का पैसा बचाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने विदेशों से आयात किए जा रहे पाम ऑयल पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि इससे देश का भारी धन विदेश जा रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने पारंपरिक सरसों के तेल को बढ़ावा देने की वकालत करते हुए कहा कि पहले लोग शुद्ध सरसों के तेल का इस्तेमाल करते थे, तब जोड़ों और घुटनों की बीमारियां इतनी आम नहीं थीं।
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