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एक एक्सेल शीट बना वैवाहिक विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने दुरुपयोग पर क्या कहा?

Kuldeep Sengar

Kuldeep Sengar

नई दिल्ली। वैवाहिक विवादों में दर्ज होने वाले आपराधिक मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पति द्वारा पत्नी से घरेलू खर्चों का हिसाब रखने को कहना अपने-आप में मानसिक या शारीरिक क्रूरता नहीं माना जा सकता। केवल इस आधार पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करना कानून के उद्देश्य के विपरीत है। इसी टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने पति के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया।

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मामले की सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि वैवाहिक शिकायतों से निपटते समय न्यायालयों को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कई मामले शादीशुदा जीवन की रोज़मर्रा की असहमति और नोकझोंक से जुड़े होते हैं। ऐसे मामलों को सीधे आपराधिक क्रूरता की श्रेणी में रखना न्यायसंगत नहीं होगा।

पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि भारतीय सामाजिक ढांचे में कई परिवारों में घरेलू वित्तीय फैसलों पर एक पक्ष का प्रभाव देखने को मिलता है। हालांकि, जब तक इससे किसी प्रकार की गंभीर मानसिक या शारीरिक क्षति सिद्ध न हो, तब तक इसे आपराधिक अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत के अनुसार, व्यावहारिक वास्तविकताओं को नजरअंदाज कर दर्ज की गई शिकायतें न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव डालती हैं।

शिकायत में पत्नी ने आरोप लगाया था कि पति उससे घर के सभी खर्चों का विस्तृत ब्योरा एक्सेल शीट में रखने के लिए कहता था और आर्थिक मामलों में दबाव बनाता था। अदालत ने पाया कि एफआईआर में किसी विशेष घटना, धमकी या गंभीर उत्पीड़न का ठोस उल्लेख नहीं किया गया है। यदि आरोपों को सत्य भी मान लिया जाए, तब भी वे भारतीय दंड संहिता के तहत क्रूरता की परिभाषा में नहीं आते।

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक कानून के दुरुपयोग को लेकर सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि इसे वैवाहिक विवादों में स्कोर बराबर करने या व्यक्तिगत दुश्मनी निकालने का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। पति की ओर से पेश वकील प्रभजीत जौहर की दलील को स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

अदालत ने दोहराया कि न्यायालयों का दायित्व है कि वे ऐसे मामलों में आरोपों की गहन जांच करें, ताकि वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिल सके और कानून के दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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