नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में निजी एयरलाइंस द्वारा त्यौहारों और छुट्टियों के समय हवाई किराए में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव और अतिरिक्त शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए नियामक दिशानिर्देश बनाने की मांग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) द्वारा दाखिल जवाब पर याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की गई है।
अदालत ने फिलहाल इस मामले में कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने हवाई किराए में भारी अंतर को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस इकॉनमी क्लास के टिकट के लिए अलग-अलग कीमत क्यों वसूलती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब एक एयरलाइन किसी रूट का किराया 8000 रुपये रखती है, तो दूसरी उसी रूट का 18000 रुपये तक वसूलती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की असमानता को लेकर कुछ न कुछ तर्कसंगत व्यवस्था होनी चाहिए।
कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि नए नियम बनाने में कितना समय लगेगा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि न्यायालय की चिंताओं से इन्कार नहीं है। इसका समाधान वैधानिक नियमों के माध्यम से ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2024 के भारतीय वायुयान अधिनियम के लागू होने के बाद उसी के तहत नए नियम बनाए जा रहे हैं। इन नियमों पर अभी परामर्श प्रक्रिया जारी है और सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है, इसलिए इसमें कुछ समय लग सकता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल पुराने नियम ही लागू हैं।

