
नई दिल्ली: राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस मामले की जांच के लिए नई विशेष जांच टीम (SIT) बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जांच टीम का नए सिरे से गठन किया जाए और इसकी कमान किसी वरिष्ठ और अनुभवी IPS अधिकारी को सौंपी जाए, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और मामले का सही सच सामने आ सके।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि जांच को किसी भी तरह के दबाव या भेदभाव से मुक्त रखा जाए। उन्होंने साफ कहा कि इस मामले को उसके तार्किक और अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच का उद्देश्य केवल सच्चाई सामने लाना होना चाहिए।
सरकार से मांगा वरिष्ठ अधिकारी का नाम
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वे उत्तर प्रदेश सरकार से बात करके ऐसे वरिष्ठ IPS अधिकारी का नाम लेकर आएं, जो नई SIT का नेतृत्व कर सके। इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी और तब सरकार को अधिकारी का नाम भी अदालत के सामने रखना होगा।
जांच निष्पक्ष हो, राजनीति से दूर रहे मामला
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत राजनीति करने की जगह नहीं है। यह एक आपराधिक मामला है और इसकी जांच कानून के अनुसार पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि जांच सही तरीके से हो।
सरकार ने कोर्ट में पेश की जांच रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जांच जारी होने के कारण फिलहाल अधिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
तीन जजों की पीठ ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने की। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने सरकार से यह भी पूछा कि क्या चढ़ावा चोरी की जांच वर्तमान में यही SIT कर रही है। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि जांच जारी है, लेकिन विस्तृत जानकारी फिलहाल साझा करना संभव नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि इस मामले में जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ होनी चाहिए, ताकि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके।
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