Last Updated: November 5, 2026

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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- नाबालिग लड़की को गर्भावस्था जारी रखने के लिए नहीं किया जा सकता मजबूर

April 24, 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला- नाबालिग लड़की को गर्भावस्था जारी रखने के लिए नहीं किया जा सकता मजबूर

नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी महिला खासकर नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ किया कि महिला की अपनी पसंद और उसका अधिकार सबसे महत्वपूर्ण है।

नाबालिग को दी गर्भपात की अनुमति

यह फैसला 15 साल की एक नाबालिग लड़की के मामले में आया, जो सात महीने से ज्यादा समय से गर्भवती थी। अदालत ने उसकी स्थिति को गंभीर मानते हुए मेडिकल तरीके से गर्भ खत्म करने की इजाजत दे दी। कोर्ट ने ध्यान दिया कि यह गर्भ उसके लिए अनचाहा है और वह पहले दो बार आत्महत्या की कोशिश भी कर चुकी है। ऐसे में गर्भावस्था जारी रखना उसके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा कि गर्भवती महिला की इच्छा को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए, न कि जन्म लेने वाले बच्चे के अधिकार को। किसी नाबालिग को जबरन गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर करने से उसके मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, सामाजिक जीवन और भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

प्रजनन अधिकार पर जोर

कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला को अपने शरीर और प्रजनन से जुड़े फैसले लेने का पूरा अधिकार है। यह अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत मिलने वाले व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निजता के अधिकार का हिस्सा है। अगर किसी महिला को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता है, तो यह उसके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।

गोद देने वाला तर्क सही नहीं

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कहना आसान है कि महिला बच्चे को जन्म देकर उसे गोद दे सकती है, लेकिन अनचाहे गर्भ के मामलों में यह तर्क उचित नहीं है। ऐसे मामलों में कोर्ट को गर्भवती महिला की स्थिति, उसकी इच्छा और उसके हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि केवल जन्म लेने वाले बच्चे के बारे में सोचना चाहिए।

अवैध गर्भपात का खतरा

सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर महिलाओं को जबरदस्ती गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो वे अवैध और असुरक्षित गर्भपात केंद्रों का सहारा ले सकती हैं। इससे उनके स्वास्थ्य और जीवन को बड़ा खतरा हो सकता है।

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