नेशनल डेस्कः सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा को बड़ा झटका दिया है। सर्वोच्च अदालत ने तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली ट्रांजिट अग्रिम जमानत पर रोक लगा दी है और साथ ही उन्हें दी गई राहत पर आश्चर्य भी जताया है। सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल शरचचंद्र चांदूरकर की पीठ ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी करते हुए नोटिस भी जारी किया है। पवन खेड़ा को इसका जवाब तीन हफ्तों के भीतर देना होगा असम सरकार ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
मामले की सुनवाई के दौरान असम सरकार की ओर से पेश एसजी तुषार मेहता ने कहा कि अपराध असम में हुआ और मामला भी असम में दर्ज हुआ, जमानत तेलंगाना हाई कोर्ट ने क्यों दी है?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पवन ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग भी की है। एसजी ने कहा कि वो असम हाई कोर्ट का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते। एसजी ने तेलंगाना हाई कोर्ट के आदेश पर रोक की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दाखिल की है। इसमें 10 अप्रैल को तेलंगाना हाईकोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पवन खेड़ा को एक हफ्ते के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी गई थी। यह राहत इसलिए दी गई थी ताकि वे संबंधित अदालत में जाकर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। यह आदेश हाई कोर्ट की एकल पीठ के जज के सुजाना ने दिया था। कोर्ट ने कहा था कि अगर पुलिस खेड़ा को गिरफ्तार करती है, तो उन्हें एक हफ्ते के लिए जमानत पर रिहा किया जाए।
क्यों दर्ज हुई FIR?
यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भूयान सरमा को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। इस पर असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। इन धाराओं में मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं।
मेष: दिन शुभ रहेगा...