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जानें ऐसा कौनसा था जुर्म… एक साथ कोर्ट को 9 पुलिसकर्मियों को सुनानी पड़ी मौत की सजा, पढ़ें पूरी जुर्म की कहानी

Madurai custodial death case

Madurai custodial death case : तमिलनाडु के मदुरै की एक अदालत ने 6 अप्रैल को एक बहुत बड़ा और सख्त फैसला सुनाया। इस केस में एक पिता (पी. जयराज) और उनके बेटे (जे. बेनिक्स) की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। अदालत ने इस मामले में 9 पुलिसकर्मियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। इसके अलावा, एक पुलिस इंस्पेक्टर श्रीधर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

कोर्ट ने क्या कहा?

अदालत ने कहा कि पिता और बेटे के साथ बहुत ही बेरहमी से व्यवहार किया गया। उन्हें कपड़े उतरवाकर बुरी तरह पीटा गया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस घटना के बारे में पढ़कर दिल दहल जाता है। कोर्ट ने यह भी बताया कि अगर इस केस की सही तरीके से निगरानी नहीं होती, तो सच सामने नहीं आ पाता।

किन पुलिसवालों को सजा मिली?

जिन पुलिसकर्मियों को सजा दी गई, उनमें शामिल हैं:
• इंस्पेक्टर श्रीधर
• सब-इंस्पेक्टर बालाकृष्णन
• सब-इंस्पेक्टर रघु गणेश
• पुलिसकर्मी मुरुगन
• समदुरई
• मुथुराजा
• चेल्लादुरई
• थॉमस फ्रांसिस
• वेइलुमुथु

 

CBI ने क्या मांग की थी?

इस मामले की जांच CBI ने की थी। CBI ने कोर्ट से कहा था कि दोषियों को सबसे सख्त सजा दी जाए यानी फांसी या बिना पैरोल के आजीवन कारावास।

 

क्या है पूरा मामला?

यह घटना 19 जून 2020 की है। पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स तमिलनाडु में मोबाइल की दुकान चलाते थे। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने तय समय से ज्यादा देर तक दुकान खुली रखी थी। इसी आरोप में पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया, और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। लेकिन कुछ ही दिनों के अंदर दोनों की मौत हो गई।

परिवार ने क्या आरोप लगाए?

परिवार वालों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने हिरासत में दोनों को बहुत मारा-पीटा। इसी टॉर्चर की वजह से उनकी मौत हो गई।

जांच कैसे हुई?

इस मामले ने पूरे देश में गुस्सा पैदा कर दिया था। मद्रास हाई कोर्ट ने इस केस पर ध्यान दिया। पहले जांच राज्य की CB-CID को दी गई । बाद में जांच CBI को सौंप दी गई । CBI ने इस मामले में 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया और उन पर हत्या का केस दर्ज किया।

कोर्ट का अहम संदेश

अदालत ने यह भी साफ किया कि तमिलनाडु पुलिस में बहुत से ईमानदार अधिकारी भी हैं। यह फैसला अच्छे पुलिसकर्मियों के खिलाफ नहीं है। लेकिन गलत करने वालों को सख्त सजा मिलनी ही चाहिए।

 

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