नई दिल्ली : आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया के जरिए जानकारी और खबरें तेजी से लोगों तक पहुंचती हैं। लोग तुरंत घटनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन यूरेशिया रिव्यू की एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। इसके मुताबिक आतंकी संगठन तेजी से कट्टरपंथ फैलाने और हमलों की साजिश रचने के लिए सोशल मीडिया मंचों का इस्तेमाल कर रहे हैं। आधुनिक आतंकी संगठन अब केवल वैचारिक मतभेदों या रसद तंत्र का ही नहीं, बल्कि उन्नत डिजिटल तकनीकों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें हथियार की तरह प्रयोग कर रहे हैं।
‘कट्टरपंथ फैलाने के लिए सोशल मीडिया मंचों का हथियारीकरण : भारतीय उपमहाद्वीप पर मंडराता बड़ा खतरा’ शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आतंकी हमले और 14 दिसंबर 2025 को ऑस्ट्रेलिया के बोंडी बीच पर हुए हमले दिखाते हैं कि चरमपंथी तंत्र सोशल मीडिया का सुनियोजित तरीके से इस्तेमाल कर हिंसा भड़का रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजीटल प्रचार, सुरक्षित संदेश मंचों और ऑनलाइन मनोवैज्ञानिक हेरफेर के जरिए कमजोर और संवेदनशील लोगों को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाया जा रहा है। कई घटनाओं को अक्सर ‘लोन वुल्फ’ हमले के रूप में दिखाया जाता है, जबकि हकीकत में ऐसे हमले संगठित और योजनाबद्ध होते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार आतंकी संगठन फर्जी खबरें, प्रचार और वैचारिक सूचना युद्ध के जरिए लोगों को प्रभावित करते हैं। इन तरीकों से अस्थिर या समाज से कटे लोगों को धर्म, राज्य या किसी काल्पनिक उद्देश्य के नाम पर उकसाया जाता है। सोशल मीडिया की कम लागत, तेज गति और वैश्विक पहुंच इसे प्रचार, भर्ती और हमलों के लिए लोगों को संगठित करने का प्रभावी माध्यम बना देती है। रिपोर्ट में इस्लामिक स्टेट और उसके सहयोगी संगठनों की भूमिका का भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि इराक और सीरिया में क्षेत्रीय नुक्सान के बावजूद आईएस ने अपने डिजिटल अभियान मजबूत किए हैं और ऑनलाइन प्रचार तंत्र के जरिए वैचारिक प्रभाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।
मेष: दिन शुभ रहेगा...