Thackeray brothers : महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने के मुद्दे ने उद्धव और राज ठाकरे को एक बार फिर साथ आने का मौका दे दिया है। इस मुद्दे पर उद्धव और राज ठाकरे साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। इसकी जानकारी खुद शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने दी है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक फोटो शेयर की। इसमें उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ नजर आ रहे हैं। उन्होंने लिखा, ‘महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्य करने के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ठाकरे एक ब्रांड हैं।’
जय महाराष्ट्र!
“There will be a single and united march against compulsory Hindi in Maharashtra schools. Thackeray is the brand!”
@Dev_Fadnavis
@AmitShah pic.twitter.com/tPv6q15Hwv— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 27, 2025
एक साथ आए ठाकरे बंधू-
इसके अलावा राउत ने एक और पोस्ट भी शेयर की और इस तस्वीर में उद्धव और राज ठाकरे साथ खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि उनके पीछे बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर नजर आ रही है। उन्होंने इस फोटो के साथ कैप्शन में लिखा, ‘जय महाराष्ट्र।’
महाराष्ट्रतील शाळांत हिंदी सक्ती विरोधात एकच आणि एकत्र मोर्चा निघेल!
जय महाराष्ट्र! pic.twitter.com/A8ATq2ra0k— Sanjay Raut (@rautsanjay61) June 27, 2025
तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी अनिवार्य-
महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदी भाषा को लेकर बवाल मचा हुआ है। स्कूलों में तीसरी भाषा के तौर पर हिंदी को अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन विपक्षी दलों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पहले अलग-अलग करना था प्रदर्शन-
राज ठाकरे ने 6 जुलाई को मुंबई में मार्च निकालने का आह्वान किया था और उद्धव ठाकरे ने 7 जुलाई को मुंबई के आजाद मैदान में आंदोलन करने की घोषणा की थी, लेकिन अब संजय राउत ने कहा है कि दोनों मिलकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
सरकार की हिंदी थोपने की कोशिश-
इससे पहले शिवसेना (उद्धव गुट) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र सरकार पर जबरन हिंदी भाषा थोपने का आरोप लगाया था। उन्होंने एक बयान में कहा था, ‘मौजूदा सरकार राज्य पर हिंदी थोपने की कोशिश कर रही है। उनका किसी भाषा या हिंदी भाषी समुदाय से कोई विरोध नहीं है, बल्कि वह किसी भी भाषा को जबरन थोपने के खिलाफ हैं।’
फूट डालो और राज करो की नीति-
उन्होंने आरोप लगाया था, ‘भाजपा की फूट डालो और राज करो की नीति स्पष्ट है। वह मराठी और अन्य भाषियों के बीच एकता को नष्ट करने की कोशिश कर रही है।’

