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उत्तर-पश्चिम भारत में अगस्त की ऐतिहासिक बारिश, इस माह भी होगा जल प्रलय

People rescue their cattle through the flooded waters of the Beas river at Baoopur village in Kapurthala district of India's Punjab state on August 28, 2025. Floods and landslides are common during the June-September monsoon season, but experts say climate change, coupled with poorly planned development, is increasing their frequency, severity and impact. (Photo by Shammi MEHRA / AFP)

नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिमी भारत में इस अगस्त महीने में 265 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 2001 के बाद सबसे अधिक और 1901 के बाद से 13वीं सबसे अधिक बारिश है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, इस क्षेत्र में मानसून के तीनों महीनों में सामान्य से अधिक वर्षा हुई है। कुल मिलाकर, 1 जून से 31 अगस्त तक उत्तर-पश्चिम भारत में 614.2 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य (484.9 मिमी) से लगभग 27} अधिक है। इस असामान्य वर्षा ने कई चरम मौसमी घटनाओं को जन्म दिया। पंजाब दशकों की सबसे भीषण बाढ़ से जूझा, जहां उफनती नदियों और टूटी नहरों के पानी से हजारों हैक्टेयर खेत जलमग्न हो गए और लाखों लोग विस्थापित हुए।

हिमालयी राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर) में बादल फटना, अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं से पुल, सड़कें और घर बह गए। दक्षिण भारत भी प्रभावित :दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगस्त में 250.6 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 31} अधिक है। यह 2001 के बाद तीसरी और 1901 के बाद 8वीं सबसे अधिक अगस्त वर्षा है। देशभर में अगस्त में 268.1 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 5} अधिक है। जून से अगस्त तक तीन महीनों में कुल 743.1 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से करीब 6} अधिक है।

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