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युद्ध की मार : थमा सड़कों का निर्माण, तारकोल के दाम दोगुने

The impact of war: road construction halted, tar prices doubled.

The Impact Of War Road Construction Halted : करनाल। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में युद्ध की चिंगारी अब प्रदेश की कर्णनगरी में भी नजर आने लगी है। पेट्रो उत्पादों की आपूर्ति बाधित होने से तारकोल (बिटुमेन) की किल्लत हो गई है।

कीमतें दोगुना, अब घाटे में ठेकेदार

इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ा है, जहां करीब 50 सड़कों के निर्माण कार्य पर पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। तय डेडलाइन बीत जाने के बावजूद काम अधूरा है। इससे आम राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क निर्माण का टेंडर जारी करते समय तारकोल की कीमत 45 रुपये के हिसाब से तय की गई थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचे हाहाकार के कारण अब इसके दाम बढ़कर 80 रुपये के आसपास पहुंच चुके हैं। सप्लाई ठप होने और कीमतें दोगुनी होने के कारण ठेकेदारों ने हाथ खड़े कर दिए हैं।

काम अधर में, स्टेट हाईवे पर असर

The impact of war: road construction halted, tar prices doubled.
The impact of war: road construction halted, tar prices doubled.

उनका कहना है कि बजट पुराने रेट के हिसाब से पास हुआ था, ऐसे में मौजूदा दरों पर काम जारी रखना उनके लिए भारी वित्तीय नुकसान का सौदा साबित हो रहा है। पीडब्ल्यूडी विभाग ने वर्ष 2025-26 के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का एक बड़ा प्लान तैयार किया था। इसके तहत जिले की लगभग 250 किलोमीटर लंबी 117 सड़कों और दो स्टेट हाईवे का पुनर्निर्माण किया जाना था। इस महत्वाकांक्षी योजना में से 65 सड़कें मार्च से पहले ही पूरी कर ली गई थीं, जबकि 40 सड़कों की प्रशासनिक अप्रूवल अभी पेंडिंग है, लेकिन तारकोल संकट की वजह से फिलहाल बची हुई सड़कों और करीब 60 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स का काम अधर में लटक गया है।

क्या कहते हैं अधिकारी

सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले मुख्य मार्गों में ‘इंद्री-करनाल स्टेट हाईवे’ शामिल है। इसका काम रुक-रुक कर चल रहा है। जिन सड़कों के निर्माण की समय-सीमा 6 से 9 महीने तय की गई थी, उनका समय पूरा होने के बाद भी काम अधूरा पड़ा है। पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन संदीप सिंह ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि युद्ध के कारण बाजार में तारकोल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है। जो स्टॉक उपलब्ध भी है, उसके भाव दोगुने हैं, यही वजह है कि कॉन्ट्रैक्टर सड़क निर्माण पूरा नहीं कर पा रहे हैं। करीब 45 सड़कों और दो स्टेट हाईवे के काम पर इसका सीधा असर पड़ा है। उन्होंने आगे बताया कि असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए ठेकेदारों को काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।

अब सरकार से उम्मीद

इस संकट ने यह साबित कर दिया है कि दुनिया के किसी एक कोने में होने वाली हलचल हमारे स्थानीय विकास को कितनी गहराई से प्रभावित कर सकती है। करनाल की जनता फिलहाल धूल और गड्ढों के बीच सफर करने को मजबूर है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस संकट से निपटने के लिए ठेकेदारों को बढ़ी हुई कीमतों पर कोई विशेष राहत देती है, या फिर जनता को सड़कों के सुचारू होने के लिए अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरने का इंतजार करना पड़ेगा।

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