विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी और महागठबंधन का ‘वोट चोरी’ मुद्दा फ्लॉप साबित हुआ है। राज्य की जनता ने कांग्रेस-राजद के नारों पर वोट देने के बजाय नीतीश कुमार की योजनाओं और भाजपा की विकास यात्रा को समर्थन दिया है। राजद-कांग्रेस के प्रचार अभियान का मुख्य आकर्षण राहुल गांधी का ‘वोट चोरी’ वाला नारा था। स्वयं राहुल गांधी का बिहार का चुनावी कैंपेन ‘वोट चोरी’ पर केंद्रित रहा। राज्यभर में उन्होंने यात्रओं और चुनावी अभियानों से लगभग 116 विधानसभा सीटों को कवर किया।
ज्ञात हो कि 1952 में बिहार में पहली बार 239 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी 15 साल पहले सिर्फ 4 पर सिमट गई थी। 2010 में बिहार में उसे पहली बार सबसे कम सीटें मिली थीं। राहुल गांधी के हारने के रिकॉर्ड में 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव भी शामिल हो गया है। पिछले 2 दशकों में सबसे पुरानी पार्टी को 95 हार का सामना करना पड़ा है। इस बार भाजपा की आईटी सैल के प्रमुख अमित मालवीय तंज कसते हुए कहते हैं, ‘अगर चुनावी निरंतरता के लिए कोई पुरस्कार होता, तो वह (राहुल गांधी) सभी पर भारी पड़ते। इस दर पर, असफलताएं भी सोच रही होंगी कि वह उन्हें इतनी विश्वसनीयता से कैसे पा लेते हैं।’

