नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बचाव में निर्वाचन आयोग के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने के लिए मंगलवार को याचिकाकर्त्ताओं को 10 दिन का समय दिया। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि यह प्रक्रिया कानून के अनुरूप थी और इस लागू करने से संबंधित आदेशों को आयोग के तीनों सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्यसभा सदस्य डोला सेन की एक नई याचिका पर निर्वाचन आयोग और अन्य को नोटिस भी जारी किया।
याचिका में यह आरोप लगाया गया है कि शीर्ष अदालत की मंजूरी के बिना बिहार एसआईआर के दौरान ‘फॉर्म 6’ में बदलाव किए गए। सांसद सेन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सांसद मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने गलत तरीके से यह दावा किया है कि ‘फॉर्म 6’ में किए गए बदलावों को शीर्ष कोर्ट द्वारा अनुमोदित किया गया था। प्रधान न्यायाधीश ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि सभी मुद्दों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने प्रथम याचिकाकर्त्ता राकेश कुमार सिंह का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह से कहा कि वे सोमवार देर शाम दाखिल किए गए निर्वाचन आयोग के जवाब पर 10 दिन के भीतर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करें।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ दायर याचिका पर अपने 248 पन्नों के जवाब में आयोग ने एसआईआर का पुरजोर बचाव किया। आयोग ने ‘फॉर्म 6’ में संशोधन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वैधानिक ‘फॉर्म 6’ में कोई बदलाव नहीं किया गया है। निर्वाचन आयोग की ओर से उप निर्वाचन आयुक्त भानु प्रकाश येतुरु द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया, ‘निर्वाचन आयोग पर आक्षेप लगाने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।’

