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Haryana News : ‘इलाज’ के इंतजार में लोग, अस्पताल निर्माण में व्यवस्था ‘बीमार’

The system in hospital construction is 'sick'

The system in hospital construction is 'sick'

महेंद्रगढ़। आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने का लक्ष्य लेकर बनाया जा रहा सात मंजिला नागरिक अस्पताल पांच साल के बावजूद अधूरा है। इस परियोजना को दो वर्ष में पूरा होना था। यह प्रशासनिक सुस्ती और बजट के अभाव में अधर में है। हालात ऐसे हैं कि वर्ष 2026 में भी इसके तैयार होने की उम्मीद कम ही है।

इस समय अस्पताल भवन का सिविल काम बहुत हद तक पूरा होने के बावजूद बिजली का काम ठप है। कुछ काम सिविल निर्माण अधूरा होने और कुछ बजट की कमी के कारण रुक गए हैं। वर्तमान में अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं पुराने इमरजेंसी वार्ड और जर्जर स्टाफ क्वार्टरों में संचालित की जा रही हैं, जहां मरीजों और चिकित्सकों दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

13 करोड़ के बिजली काम में रुकावट

अस्पताल में बिजली और आधुनिक उपकरणों से जुड़े कार्यों के लिए करीब 13 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था। लेकिन अब तक केवल एयर कंडीशनिंग, सब-स्टेशन और सीसीटीवी कैमरों का कार्य ही लगभग पूरा हो पाया है। अस्पताल को पूरी तरह संचालित करने के लिए जरूरी अन्य विद्युत कार्य बजट के अभाव में अधूरे हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा अस्पताल के शेष निर्माण कार्यों के लिए लगभग 68 करोड़ रुपये का संशोधित एस्टीमेट करीब छह महीने पहले स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय भेजा गया था।

जर्जर भवन में हो रहा इलाज

अब तक बजट को मंजूरी नहीं मिल पाई है। अधिकारियों के अनुसार बजट स्वीकृति के बाद ही टेंडर प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। लोग बताते हैं कि यदि अभी मंजूरी मिल भी जाए तो निर्माण पूरा होने में कम से कम दो वर्ष और लग सकते हैं। वर्तमान में स्वास्थ्य सेवाएं पुराने और तंग भवनों में संचालित हो रही हैं। मरीजों को भीषण गर्मी, सर्दी और बरसात में भी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में पर्याप्त जगह नहीं होने के कारण डॉक्टरों और स्टाफ के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।

अधूरी हैं कई महत्वपूर्ण काम

साढ़े छह करोड़ रुपये से एसी और एक करोड़ से बिजली सब-स्टेशन का काम हो चुका है, लेकिन अस्पताल का मुख्य सिविल और फिनिशिंग वर्क अब भी अधूरा है। इमरजेंसी ब्लॉक, रोड पार्किंग, मॉर्चरी, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, आधुनिक लैब, ट्रॉमा सेंटर, एमआरआई, ऑपरेशन थिएटर और ऑक्सीजन प्लांट जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं शुरू नहीं हो पाई हैं। इन सुविधाओं के अभाव में गंभीर मरीजों को आज भी रेवाड़ी, रोहतक और जयपुर जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है। कई मामलों में मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ जाती है।

कई सामाजिक संगठनों में रोष

अस्पताल निर्माण में हो रही देरी को लेकर सामाजिक संगठनों और आमजन में भारी नाराजगी है। सामाजिक कार्यकर्ता विकास कुमार, प्रदीप कुमार, रोहन, बाबूलाल और राजेंद्र ने कहा कि सरकार की धीमी कार्यशैली के कारण जनता परेशान हो रही है। उनका कहना है कि अस्पताल प्रबंधन सीमित संसाधनों में बेहतर सेवाएं देने का प्रयास कर रहा है, लेकिन बुनियादी ढांचे के अभाव में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

विभाग के जेई इलेक्ट्रिक ब्रांच दीपक कुमार ने बताया कि अस्पताल में लगभग 13 करोड़ रुपये के विद्युत कार्य होने हैं। अब तक करीब साढ़े छह करोड़ रुपये एसी कार्य तथा एक करोड़ रुपये सब-स्टेशन व वायरिंग पर खर्च किए जा चुके हैं। शेष कार्य बजट उपलब्ध होने और सिविल निर्माण पूरा होने के बाद ही किए जा सकेंगे। सिविल ब्रांच के जेई अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल भवन को पूरा करने के लिए 68 करोड़ रुपये का बजट स्वास्थ्य विभाग को भेजा जा चुका है। बजट स्वीकृत होते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।

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