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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: बाइक, लोकल ट्रेन और कैब से भागे आरोपी, मुंबई से कोटा तक ऐसे पहुंचे

मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग करने के बाद फरार हुए आरोपियों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए बाइक, लोकल ट्रेन, कैब और लंबी दूरी की ट्रेन समेत कई माध्यमों का इस्तेमाल किया। मुंबई क्राइम ब्रांच ने आरोपियों के भागने के पूरे रूट का खुलासा किया है।

तीनों आरोपी सबसे पहले बाइक से रेलवे स्टेशन पहुंचे

मुंबई पुलिस के अनुसार, फायरिंग की वारदात को अंजाम देने के बाद तीनों आरोपी सबसे पहले बाइक से अंधेरी रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां से उन्होंने लोकल ट्रेन पकड़ी और बोरीवली रेलवे स्टेशन पहुंचे। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया कि बोरीवली पहुंचने के बाद आरोपियों में से एक ने कैब बुक की, जिसके जरिए तीनों मुंबई से सूरत पहुंचे। शुरुआती योजना सूरत से राज्य परिवहन (एसटी) बस के जरिए आगे जाने की थी, लेकिन रास्ते को लेकर असमंजस की स्थिति बनने पर उन्होंने अपना प्लान बदल दिया।

अधिकारी के मुताबिक, जल्दबाजी में तीनों आरोपी सूरत रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां से कोटा जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए। इस तरह आरोपियों ने फायरिंग के बाद लगातार अपने ठिकाने और यात्रा के साधन बदलते हुए मुंबई से कोटा तक का सफर तय किया। टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हुई फायरिंग के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसियां अब आरोपियों के नेटवर्क, उनकी मदद करने वालों और वारदात की साजिश से जुड़े अन्य पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सराहना की

इसी बीच राजस्थान के कोटा में आरोपियों को पकड़ने वाली पुलिस टीम की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सराहना की है। मुख्यमंत्री ने कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम और उनकी टीम को फोन कर बधाई दी। इस पूरे ऑपरेशन में कोटा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस के इनपुट पर तीन आरोपियों को रेलवे स्टेशन से पकड़ा।

एसपी तेजस्विनी गौतम ने क्या बताया

एसपी तेजस्विनी गौतम ने कहा कि यह पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन था। कोटा पुलिस और मुंबई पुलिस ने जिस तत्परता और रिस्पॉन्स टाइम के साथ कार्रवाई की, वह सराहनीय है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कोटा पुलिस को बधाई दी है। एसपी ने कहा कि अच्छा काम करने वाले पुलिसकर्मियों को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी टीम के सम्मान का प्रस्ताव आईजी के माध्यम से पुलिस मुख्यालय (पीएचक्‍यू) भेजा जाएगा। ऑपरेशन के दौरान गोपनीयता बरती गई, ताकि किसी भी स्तर पर जल्दबाजी में गलत कदम न उठे। टीम को स्पष्ट निर्देश थे कि आरोपियों को हर हाल में पकड़ना है।

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