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दिल्ली में ‘तिरंगा सभा’ से पहले पुलिस की कार्रवाई, 150 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में आयोजित होने वाली ‘तिरंगा सभा’ में शामिल होने जा रहे 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। ये जानकारी दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों के हवाले से दी गई है। वहीं, एसएफआई, डीवाईएफआई, एआईएसएफ और एआईवाईएफ के कार्यकर्ताओं ने ‘तिरंगा मार्च’ निकालकर विरोध प्रदर्शन किया।

सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि उन्होंने कहा था कि किसी को भी सीपी (कनॉट प्लेस) तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा। लेकिन हम यहां पहुंच गए हैं। हम शहर के मुख्य हिस्से में आ गए हैं। हमने दिल्ली पुलिस को चुनौती दी है, हमने उनके प्रतिबंध को तोड़ा है, और हमने तिरंगे का मान रखा है। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मंडी हाउस के पास प्रदर्शन कर रहे आइसा और वामपंथी दलों के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

इससे पहले पुलिस ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई कॉक्रोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके को हिरासत में ले जाने के कुछ मिनट बाद हुई। दिपके कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे आयोजित होने वाली ‘तिरंगा सभा’ में शामिल होने जा रहे थे। नेहा बोरा को मंडी हाउस के पास से हिरासत में लिया गया। वह आइसा और अन्य वामपंथी संगठनों के कार्यकर्ताओं के साथ सीजेपी के ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में शामिल होने जा रही थीं।

दिपके ने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में ‘तिरंगा सभा’ का आह्वान किया था। उन्होंने लोगों से अपनी पार्टी के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में एकत्र होने और तिरंगा फहराने की अपील की थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दिपके को दो नोटिस जारी किए थे। पुलिस ने उन्हें कनॉट प्लेस में सभा आयोजित नहीं करने की हिदायत दी थी। नोटिस में कहा गया था कि नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने इस आयोजन की अनुमति नहीं दी है और कार्यक्रम स्थल पर निषेधाज्ञा लागू है। पुलिस ने यह भी चेतावनी दी थी कि निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीजेपी के प्रवक्ता मेहर पसरीचा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज हमारा मुख्य उद्देश्य इस बात पर जोर देना है कि तिरंगा कहां फहराना है, यह तय करना हमारा अधिकार है। कोई भी हमें यह नहीं बता सकता कि हम अपना राष्ट्रीय ध्वज कहां लहराएं। हम यह फैसला खुद करेंगे।” पसरीचा ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज लंबे समय से देशभक्ति का प्रतीक रहा है और इसे फहराने के रास्ते में कोई प्रतिबंध या बाधा नहीं होनी चाहिए।

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