नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवार रहे जहांगीर खान को राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, वह नेपाल के रास्ते देश छोड़कर भागने की कोशिश कर रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए उसे पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उसे कोलकाता लाया जा रहा है।
चुनाव से पहले ही मुकाबले से हटने का किया था ऐलान
जहांगीर खान का नाम फलता विधानसभा उपचुनाव के दौरान काफी चर्चा में रहा था। 21 मई को हुए उपचुनाव से ठीक 48 घंटे पहले उसने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चुनाव लड़ने से पीछे हटने की घोषणा कर दी थी।
हालांकि, नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख निकल चुकी थी। इसी वजह से उसका नाम ईवीएम में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में बना रहा और मतदाता उसके नाम पर वोट भी डाल सकते थे।
वीडियो । तृणमूल कांग्रेस नेता जहांगीर खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास कथित “वसूली” (एक्सटॉर्शन) के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
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— पीटीआई न्यूज_भाषा (@PTINews_Bhasha) June 8, 2026
चुनाव में मिली करारी हार
24 मई को जब चुनाव परिणाम घोषित हुए तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ी जीत हासिल की। भाजपा उम्मीदवार ने एक लाख 9 हजार से अधिक वोटों के अंतर से चुनाव जीता। वहीं, जहांगीर खान को केवल 7,783 वोट मिले और वह चौथे स्थान पर रहा। चुनाव परिणाम आने के बाद से वह सार्वजनिक कार्यक्रमों और मीडिया से पूरी तरह गायब था।
हाई कोर्ट से राहत खत्म होने के बाद बढ़ी मुश्किलें
जहांगीर खान के खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज बताए जाते हैं। उस पर चुनाव के दौरान मतदाताओं को डराने-धमकाने के आरोप भी लगे थे। उपचुनाव से पहले उसे अदालत से कुछ कानूनी राहत मिली हुई थी, जिसके कारण पुलिस उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। लेकिन 26 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने उसे मिली सभी कानूनी सुरक्षा और राहत वापस ले ली। अदालत के इस फैसले के बाद उसकी गिरफ्तारी में कोई कानूनी रुकावट नहीं बची थी। इसके बाद पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी।
फलता उपचुनाव में लगे थे अनियमितताओं के आरोप
फलता विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव कई विवादों के कारण भी चर्चा में रहा। चुनाव के दौरान कई मतदान केंद्रों पर गड़बड़ी और अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे। कुछ जगहों पर ईवीएम से छेड़छाड़ की शिकायतें भी सामने आई थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने कुछ बूथों पर दोबारा मतदान कराने का फैसला किया था। इन्हीं विवादों के बीच जहांगीर खान लगातार राजनीतिक और मीडिया चर्चाओं का केंद्र बना रहा।
“पुष्पा” बयान से सुर्खियों में आया था नाम
जहांगीर खान का नाम “पुष्पा” के नाम से भी काफी मशहूर हुआ था। बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान दक्षिण 24 परगना जिले में चुनावी माहौल को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई थी।उस समय चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को विशेष पुलिस पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया था। अजय पाल शर्मा ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को सख्त चेतावनी दी थी और खुद को फिल्मी किरदार “सिंघम” की तरह सख्त अधिकारी बताया था।
इस पर जवाब देते हुए जहांगीर खान ने कहा था कि वह भी “पुष्पा” है और किसी के सामने झुकने वाला नहीं है। इसके बाद “सिंघम बनाम पुष्पा” की यह जुबानी जंग काफी चर्चा में रही और जहांगीर खान को “पुष्पा” के नाम से पहचान मिलने लगी।
अब आगे क्या?
नेपाल सीमा से गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस जहांगीर खान से पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह नेपाल क्यों जाना चाहता था और उसके खिलाफ दर्ज मामलों में उसकी क्या भूमिका रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

