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TMC के बागी सांसदों के भविष्य के लिए कानूनी राय लेंगे ओम बिरला

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TMC Rebel MPs, Om Birla seek legal opinion : नई दिल्ली। तृणमूल के बागी सांसदों का पार्टी में विलय मामला अभी अधर में है। इस विलय को मान्यता मिलेगी या नहीं। इस बारे में लोकसभा के अध्यक्ष ओम बिरला भी असमंजस में हैं। वे इस बारे में विशेषज्ञों से राय लेने की बात कर रहे हैं।

मानसून सत्र से पहले होगा फैसला

एक उम्मीद है कि ये फैसला लोकसभा के मानसून सत्र में लिया जाएगा। यह सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने की आस है। इस मामले में पहले ही विशेषज्ञों ने संविधान के कुछ प्रावधानों का हवाला देते हुए मौजूदा विलय पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के NCPI में विलय के बाद उन्हें अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग पर कानूनी राय ले सकते हैं। सूत्रों के अनुसार TMC के बागी सांसदों की मांग पर कोई भी फैसला संसद के मानसून सत्र से पहले लिया जाएगा।

लिखित में ली जाएगी राय

बताया गया कि बागी सांसदों की मांग पर निर्णय केंद्रीय विधि मंत्रालय की लिखित राय के आधार पर लिया जाएगा। मंत्रालय किसी वरिष्ठ विधि अधिकारी से परामर्श के बाद राय देगा। यदि बात करें सूत्रों की तो इस बारे में लिखित कानूनी राय ली जाएगी, जिससे कि यदि लोकसभा अध्यक्ष के अंतिम निर्णय को अदालत में चुनौती दी जाती है, तो वह न्यायिक जांच-परख की कसौटी पर खरा उतरें। लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ पीडीटी आचारी ने संविधान की 10वीं अनुसूची के पैरा-4 का हवाला देते हुए कहा कि केवल कोई राजनीतिक दल ही दूसरे राजनीतिक दल में विलय कर सकता है।

पूर्व अधिकारी बता रहे इसे नया प्रयोग

उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल का नेतृत्व दूसरे राजनीतिक दल में विलय का फैसला करता है, तो उसके सांसदों और विधायकों को उस विलय से सहमत होना होता है, लेकिन केवल सांसद या विधायक अपने स्तर पर किसी दूसरे राजनीतिक दल में विलय नहीं कर सकते। संविधान में यही प्रावधान है। निर्वाचन आयोग के एक पूर्व अधिकारी ने TMC के बागी सांसदों की NCPI में विलय की मौजूदा योजना को नया प्रयोग बताया। उन्होंने कहा कि कानून की नजर में यह विलय अवैध है, लेकिन इसकी वैधता की जांच का काल अवधि क्या होगी यह निश्चित नहीं है। ऐसे में इस मामले का फैसला टाला जा सकता है।

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