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ट्रैफिक रूल तोड़ने वाले हो जाएं सावधान! सरकार बना रही नया सिस्टम, रद्द होंगे ड्राइविंग लाइसेंस

Traffic rule

Traffic rule

Traffic rule: भारत में हर साल होने वाले लाखों सड़क हादसे सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि टूटते परिवारों की कहानी हैं। तेज रफ्तार, रेड लाइट जंप, नशे में ड्राइविंग और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाना, ये लापरवाहियां अब सीधे ड्राइविंग लाइसेंस पर भारी पड़ सकती हैं। केंद्र सरकार जल्द ही लाइसेंस के लिए ‘ग्रेडेड अंक प्रणाली’ लागू करने की तैयारी में है, जिससे बार-बार नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई संभव होगी।

अंक कटेंगे, लाइसेंस होगा निलंबित
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संकेत दिए हैं कि नई व्यवस्था के तहत हर ड्राइविंग लाइसेंस को निर्धारित अंकों के साथ जोड़ा जाएगा। ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर इन अंकों में कटौती होगी। ओवरस्पीडिंग, सिग्नल तोड़ना, गलत दिशा में वाहन चलाना, नशे में ड्राइविंग और लापरवाही से गाड़ी चलाना जैसे गंभीर उल्लंघनों पर ज्यादा अंक काटे जाएंगे। यदि किसी चालक के सभी अंक समाप्त हो जाते हैं, तो उसका लाइसेंस छह महीने तक निलंबित किया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने पर लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई संभव होगी।

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क्यों जरूरी है सख्ती?
देश में हर साल लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं और करीब 1.8 लाख लोगों की जान चली जाती है। इनमें बड़ी संख्या 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की है। हेलमेट और सीट बेल्ट का इस्तेमाल न करना, तेज रफ्तार और मोबाइल का उपयोग हादसों के प्रमुख कारण बने हुए हैं।

सरकार पहले ही मोटर वाहन अधिनियम के तहत भारी जुर्माने लागू कर चुकी है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि केवल आर्थिक दंड से स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। ऐसे में अंक आधारित प्रणाली एक दीर्घकालिक अनुशासनात्मक उपाय के रूप में देखी जा रही है।

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पीड़ितों को त्वरित राहत
सड़क सुरक्षा के साथ-साथ दुर्घटना के बाद त्वरित इलाज भी प्राथमिकता में है। केंद्र सरकार की योजना के तहत हादसे की तारीख से सात दिन तक घायल व्यक्ति को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। सरकार ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे ‘गुड समैरिटन’ भावना के तहत घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में संकोच न करें। कानूनी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि मदद करने वाले व्यक्ति को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

 

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