जालंधर। चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में चल रही मतगणना में सबसे अहम पश्चिम बंगाल के रुझानों में भारतीय जनता पार्टी सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) से आगे निकल गई है। 294 सीटों की विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की ज़रूरत है, यानी रुझानों में ये आंकड़ा भाजपा पार कर चुकी है।
यहां वर्ष 2011 से टीएमसी की सरकार है और ममता बनर्जी 15 सालों से राज्य की मुख्यमंत्री हैं। भाजपा के जीतने के बाद ये पहला मौका होगा जब वह राज्य में सरकार बनाएगी। पिछली बार टीएमसी को 213 और बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर आए लगभग सभी एग्ज़िट पोल से संकेत मिलते हैं कि टीएमसी और बीजेपी के बीच वोट शेयर का अंतर कम रहेगा। अगर किसी एक पार्टी को बहुमत मिलता भी है, तो उसकी जीत का अंतर बड़ा नहीं होगा।
इसी कारण नतीजों में अटकलें तेज हैं। बीते करीब 50 साल से पश्चिम बंगाल में ज़्यादातर एकतरफा चुनाव होते रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो चाहे कांग्रेस हो, लेफ़्ट हो या फिर टीएमसी, जिस भी पार्टी को जीत मिली, उसे भारी बहुमत भी हासिल हुआ। इस बार का चुनाव कई वजहों से सुर्खियों में रहा। सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए था। इसमें चुनाव से कुछ दिन पहले करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। 4 मई के नतीजे यह भी तय करेंगे कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी करती हैं या नहीं।
साथ ही भारतीय जनता पार्टी के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम है क्योंकि वह ऐसे राज्यों में पैठ बनाने की कोशिश लंबे समय से कर रही है, जहां उनकी सरकार नहीं है और इस कोशिश में पश्चिम बंगाल हमेशा से केंद्र में रहा है. नतीजों की रात से पहले कोलकाता में माहौल शांत है। शहर के अलग-अलग हिस्सों में केंद्रीय सुरक्षा बल और राज्य पुलिस बड़ी संख्या में तैनात है। मतगणना केंद्रों के बाहर भी कड़ा पहरा है. हालांकि इस बीच एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में 21 मई को दोबारा मतदान कराने की घोषणा की गई थी।
Also Read :
Also Read :
Also Read :
Also Read :
Also Read :
मेष: दिन शुभ रहेगा...