
नेशनल डेस्कः भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो बीते 20 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रही है, लेकिन आज अचानक हजारों फ्लाइटों के कैंसिल होने से यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। देश के कई बड़े एयरपोर्ट्स पर अफरा-तफरी का माहौल है। भारतीय एविएशन बाजार के 60 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर इंडिगो का कब्जा है, यानी हर दिन अगर 10 लोग हवाई यात्रा करते हैं, तो उनमें से 6 लोग इंडिगो के प्लेन में बैठते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इंडिगो की शुरुआत कैसे हुई थी और इसे किसने बनाया? आइए जानते हैं इसकी कहानी—
इंडिगो की शुरुआत
इंडिगो ने 2004 में भारतीय एविएशन मार्केट में कदम रखा। इसकी स्थापना दो दोस्तों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल ने मिलकर की। दोनों इसके पहले इंटरग्लोब एविएशन नाम से एयरलाइन शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन लाइसेंस मिलने के बाद 2004 में इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड और इंडिगो दोनों की आधिकारिक शुरुआत हुई। शुरू में दोनों की इसमें बराबर की हिस्सेदारी थी।

शुरुआत में इंडिगो के पास केवल एक ही विमान था। उस समय भारतीय आसमान पर जेट एयरवेज का दबदबा था, एयर इंडिया बड़ा नाम था और विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइन शानदार सुविधाओं के साथ चर्चा में थी। इतने बड़े मुकाबले के बीच इंडिगो ने शून्य से शिखर तक का सफ़र तय किया और कुछ ही वर्षों में “किंग ऑफ एयरलाइंस” कहलाने लगी।
क्यों पड़ा नाम ‘IndiGo’?
एयरलाइन का नाम ‘India on the Go’ के कॉन्सेप्ट पर रखा गया। इसी आधार पर इसे IndiGo नाम मिला।
किराए के प्लेन से हुई शुरुआत
दुनिया में विमान निर्माण दो कंपनियों बोइंग और एयरबस के बीच बंटा हुआ था। जहां भारत की लगभग सभी एयरलाइंस बोइंग के विमान इस्तेमाल कर रही थीं, वहीं इंडिगो ने एयरबस से 100 एयरबस A320 विमान खरीदने की घोषणा कर सबको चौंका दिया। एयरबस ने भारतीय बाजार में मजबूत एंट्री पाने के लिए इंडिगो को लगभग 40–50% डिस्काउंट दिया। राहुल और राकेश ने इन 100 विमानों को आधे दाम में खरीदा और बाद में सभी को मुनाफे के साथ बेच दिया। इस सौदे से इंडिगो को करीब 200 करोड़ रुपये का लाभ हुआ। इसके बाद एयरलाइन ने इन्हीं पैसों से विमान लीज पर लेकर कई बड़े शहरों में उड़ानें शुरू कीं।

कामयाबी की वजह
इंडिगो ने भारत में लो-कॉस्ट एयरलाइन मॉडल को सफलतापूर्वक लागू किया। महंगी सुविधाओं के बजाय इसने समय पर उड़ान, भरोसेमंद सेवा और कम किराये को प्राथमिकता दी। इससे यह मिडिल क्लास भारतीयों की पसंदीदा एयरलाइन बन गई।
इंडिगो का विस्तार (टाइमलाइन)
2011: 180 एयरबस A320 का बड़ा ऑर्डर
2012: 50 करोड़ यात्रियों को सेवा देने के साथ देश की सबसे बड़ी एयरलाइन बनी
2015: 100 नए विमानों का और ऑर्डर
2019: 250 नए एयरबस विमानों का ऑर्डर
2020: कोविड के दौरान कार्गो सेवा शुरू की
2023: 500 विमानों का रिकॉर्ड ऑर्डर—एविएशन इतिहास का सबसे बड़ा
2023: 10 करोड़ यात्रियों को सेवा देने का नया मील का पत्थर

एशिया की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन
अगस्त 2025 तक इंडिगो की घरेलू मार्केट हिस्सेदारी 64.2% थी। 2025 में कंपनी 34 घरेलू और 43 अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर रोजाना 2,700 उड़ानें संचालित कर रही थी। इंडिगो भारत की सबसे बड़ी और एशिया की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइन बन चुकी है।
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