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सच्चे प्यार की मिसाल… शादी के दो महीने बाद अपनी किडनी देकर बचाई पत्नी की जान

Dhanbad Husband kidney donated

Dhanbad Husband kidney donated

धनबादः पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया के सबसे गहरे और मजबूत रिश्तों में से एक माना जाता है। यह रिश्ता केवल दो लोगों का साथ नहीं होता, बल्कि इसमें प्रेम, विश्वास और समर्पण की मजबूत नींव होती है। इसी रिश्ते को सच्चे अर्थों में निभाया है धनबाद के भूली बी-ब्लॉक के रहने वाले इंद्रपाल सिंह ने। उन्होंने अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए अपनी ही एक किडनी दान कर दी।

शादी के दो महीने बाद ही आया बड़ा संकट
इंद्रपाल सिंह और सतबिंदर कौर की शादी अगस्त 2018 में हुई थी। शादी के बाद दोनों ने अपनी नई जिंदगी और भविष्य के कई सपने देखे थे। लेकिन शादी के कुछ ही समय बाद सतबिंदर की तबीयत लगातार खराब रहने लगी। शुरुआत में सामान्य बीमारी समझकर इलाज कराया गया, लेकिन जब डॉक्टरों ने जांच की तो एक बड़ा झटका लगा। पता चला कि सतबिंदर की दोनों किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी जान बचाने का एक ही तरीका है किडनी ट्रांसप्लांट।

आर्थिक परेशानी ने बढ़ाई मुश्किल
किडनी ट्रांसप्लांट का इलाज काफी महंगा होता है। इसी दौरान सतबिंदर की नौकरी भी छूट गई। इंद्रपाल को भी पत्नी की देखभाल के लिए अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी। ऐसी स्थिति में परिवार पर आर्थिक संकट आ गया। इलाज का खर्च जुटाना बहुत मुश्किल हो गया। हालत इतनी खराब हो गई कि सतबिंदर के मायके वालों की भी हिम्मत टूटने लगी। उन्होंने इंद्रपाल को दूसरी शादी करने की सलाह तक दे दी।

इंद्रपाल ने नहीं छोड़ा पत्नी का साथ
लेकिन इंद्रपाल सिंह ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी पत्नी का साथ हर हाल में निभाने का फैसला किया। उन्होंने डॉक्टरों से बात की और अपनी एक किडनी पत्नी को देने का निर्णय लिया। इंद्रपाल के पिता, जो बीसीसीएल में कर्मचारी हैं, उन्होंने भी परिवार की मदद की और किसी तरह पैसे का इंतजाम किया। काफी संघर्ष और प्रयास के बाद अक्टूबर 2022 में किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक हो गया। आज दोनों स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।

धनबाद में किडनी विशेषज्ञ की कमी
इस घटना के बीच एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या भी सामने आती है। लगभग 32 लाख की आबादी वाले धनबाद में सरकारी अस्पतालों में एक भी नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) नहीं है।स्वास्थ्य विभाग के अनुमान के अनुसार धनबाद में करीब 6 हजार लोग किडनी से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित हैं। इनमें से लगभग 1800 मरीज गंभीर स्थिति में हैं और रोज जिंदगी और मौत से लड़ रहे हैं।

इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है
किडनी विशेषज्ञ नहीं होने की वजह से मरीजों को इलाज के लिए दूसरे शहरों का सहारा लेना पड़ता है। हर महीने करीब 150 मरीज जांच और इलाज के लिए वेल्लोर, दिल्ली, कोलकाता जैसे शहरों में जाते हैं। कई मरीज नियमित डायलिसिस के सहारे अपनी जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

 

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