Last Updated: October 17, 2026

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केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जोधपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में किसान मेला में सहभागिता कर विद्यार्थियों को किया संबोधित

March 4, 2025

केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने जोधपुर स्थित कृषि विश्वविद्यालय में किसान मेला में सहभागिता कर विद्यार्थियों को किया संबोधित

जोधपुर/नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राजस्थान में जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित किसान मेला में सहभागिता की और उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित किया। इस दौरान केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि किसान भाई-बहन भी मेरा परिवार ही है। आज आपसे मिलकर बहुत प्रसन्न हूं, लेकिन मैं अतिथि नहीं हूं और मैं किसान भाई-बहनों के लिए मेहमान कैसे हो सकता हूं, मैं भी आपके परिवार का सदस्य हूं और खुद भी किसान हूं। मैं हर महीने अपने खेत पर जाता हूं, खेती करता हूं, कृषि जीवन का आधार है।

कांग्रेस ने कभी किसानों का भला नहीं किया
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि जब देश में कांग्रेस और अन्य दलों की सरकारें थी, तब प्राकृतिक आपदा में अगर फसलें खराब हो जाती थी तो उन्हें मुआवज़ा ही नहीं मिल पाता था, क्योंकि पिछली सरकारों की इकाई तहसील थी। अगर 10 गांव के किसानों की फसल खराब हो जाए कोई राहत नहीं मिलती थी, क्योंकि उनकी इकाई तहसील थी, इसलिए जिनकी फसलें खराब हो जाती थी वो किसान भगवान से प्रार्थना करते थे कि पूरी की पूरी तहसील की फसल खराब हो जाए ताकि उनको मुआवजा मिल सके, लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने तय किया कि अगर एक किसान की फसल भी खराब हो जाए तो बीमा कंपनी को उसको मुआवजा देना पड़ेगा। हमने ये भी तय किया है कि सर्वे रिपोर्ट आने के बाद तय समय सीमा में किसान के खाते में राशि चली जाए अगर तय समय सीमा में किसान के खाते में राशि नहीं जाती है तो बीमा कंपनी पर 12% ब्याज लगाकर किसान के खाते में राशि डालेगी।

किसानों का खेत नहीं, तीर्थ है
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि केवल परंपरागत फसलों से काम नहीं चलेगा, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय को बधाई देता हूं, उन्होंने ऐसे प्रयास किए जिससे कई परिस्थितियों में किसान को फायदा हो सकता है। विविधीकरण, इंटरक्रॉपिंग अलग-अलग तरीके से हम कैसे विविधीकरण के माध्यम से ज्यादा फायदा कर सकते हैं। एक बात और है, वह है प्राकृतिक और जैविक खेती। कई राज्यों में खाद के ज्यादा उपयोग से जमीन को बंजर भूमि की कगार पर पहुंचा दिया है। उर्वरक क्षमता घट रही है, मित्र कीट मारे जा रहे हैं, केंचुओं का पता नहीं है, कई तरह के मित्र कीट समाप्त हो गए हैं, इसलिए आज नहीं तो कल हमें प्राकृतिक खेती, जैविक खेती पर विचार करना पड़ेगा, इसलिए प्राकृतिक कृषि मिशन बनाया है, एक साथ नहीं करना है, लेकिन 5 एकड़ जमीन है तो कम से कम आधा एकड़ पर प्राकृतिक खेती हो।

मैं जोधपुर विश्वविद्यालय के मित्रों से यही कहूंगा कि हमें भी समाज की सेवा करनी है, यूनिवर्सिटी, वैज्ञानिक और किसान के संबंध जब तक नहीं रहते, तब तक हम जितना भी कुछ कर ले कोई फायदा नहीं रहता। अगर हमने शोध किया है तो उसे किसान तक ढंग से पहुंचा दें, विज्ञान और किसान मिले, यूनिवर्सिटी, किसान को नई टेक्नोलॉजी, शोध की जानकारी दें, जिससे वह उनका उपयोग खेतों में कर सकें। किसानों का खेत नहीं तीर्थ है, हमें उसमें जाना चाहिए। आज हमने कई फसलों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है। आज वो दिन नहीं है कि हमें अमेरिका से सड़ा गेहूं मंगवाना पड़े। अब तो हिंदुस्तान का गेहूं, दुनियाभर में धूम मचा रहा है। यह किसान की मेहनत है लेकिन हमें आगे जाकर दुनिया का फूड बास्केट बनाना है।

किसानों की सेवा ही भगवान की पूजा
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फल, सब्जी और अनाज किसी भी मशीन में बनाई नहीं जा सकता है, वो तो किसान ही खेत में पैदा कर सकता है और जीवन का आधार भी खेती, किसानी ही है। आज भी आधे से ज्यादा आबादी खेत पर ही निर्भर है। कोविड के दौरान जब सब कारखाने बंद हो गए तो एक ही कारखाना काम करता था, खेती और किसान लगातार फसलों का उत्पादन कर रहा था। भारत और विश्व के लिए खेती जरूरी है। कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा है, उसके प्राण है और किसानों की सेवा मेरे लिए भगवान की पूजा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में कैसे खेती, किसानी आगे बढ़े, कैसे किसानों की आमदनी बढ़े, हमारी जलवायु अलग-अलग है, वर्ष कम होती है, रेत चारों तरफ फैली हुई है, भावी चमत्कार करने का सामर्थ्य है तो केवल किसानों में है।

वन नेशन वन इलेक्शन
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पांचों साल, 12 महीने होने वाले चुनाव हमारे देश की प्रगति और विकास में बाधा है। पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव खत्म नहीं हुए कि उसके चार माह बाद देश में लोकसभा चुनाव शुरू हो गए। लोकसभा चुनाव खत्म हुए नहीं कि हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड में चुनाव शुरू हो गए, ये चुनाव हुए नहीं कि, दिल्ली का दंगल शुरू हो गया और अब सभी राजनैतिक दल और नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। हमारे देश में हर छह माह में कहीं न कहीं चुनाव होते हैं। ये बार-बार होने वाले चुनाव में बड़ी मात्रा में धन खर्च होता है। सुरक्षा बल और अधिकारी-कर्मचारी भी चुनाव कराने एक राज्य से दूसरे राज्यों में जाते हैं।

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और राज्य के मंत्रीगणों का भी समय खराब होता है। लॉन्ग टर्म प्लानिंग और विकास के सभी काम ठप्प हो जाते हैं, वहीं शिवराज सिंह ने युवाओं से भी अपील की है कि स्टूडेंट फॉर वन नेशन वन इलेक्शन फोरम बनाएं और इस अभियान को जन-आंदोलन बनाएं। शिवराज सिंह ने कहा कि अगर देश में एक साथ चुनाव होंगे तो बाकी साढ़े चार साल सरकारें केवल विकास के काम में जुट सकती है। इसलिए संविधान में संशोधन कर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए।

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