लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि समाजवाद के प्रणेता डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने भगवान राम, कृष्ण और शिव के रूप में भारत की पूर्णता के ”तीन महान स्वप्न” प्रस्तुत किए थे, जो कानून के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए काफी मायने रखते हैं। मुख्यमंत्री ने डॉक्टर राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए समाजवादी विचारक डॉक्टर राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोहिया मंदिर नहीं जाते थे और न ही किसी विशेष उपासना पद्धति में विश्वास रखते थे, लेकिन उन्होंने अपने एक आलेख में राम, कृष्ण और शिव को भारत के ”तीन महान स्वप्न” के रूप में उल्लेखित किया था। आदित्यनाथ ने कहा, ”लोहिया के विचारों के अनुसार, व्यक्ति का मस्तिष्क भगवान शिव जैसा होना चाहिए क्योंकि (भगवान) शिव बिना विचलित हुए हिमालय की सबसे ऊंची चोटी पर बैठकर साधना करने में सक्षम हैं और श्मशान में भी उसी एकाग्रता से साधना कर सकते हैं।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधि के विद्यार्थियों और पेशेवरों को भी इसी तरह मानसिक दृढ़ता और एकाग्रता विकसित करनी चाहिए, ताकि वे कठिन परिस्थितियों में भी विवेकपूर्ण निर्णय ले सकें।
उन्होंने कहा, ”व्यक्ति का हृदय भगवान कृष्ण जैसा होना चाहिए, जिसमें गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए भी संवेदना हो।” उन्होंने कहा कि विधि के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए यह गुण विशेष रूप से आवश्यक है, क्योंकि न्याय की अवधारणा केवल कानून के ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के प्रति संवेदनशीलता भी इसकी महत्वपूर्ण कसौटी है।
मुख्यमंत्री ने कहा, ”व्यक्ति के कर्म और वचन भगवान राम जैसे होने चाहिए क्योंकि (भगवान) राम का जीवन मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और वचन के पालन का आदर्श प्रस्तुत करता है।” उन्होंने कहा कि विधि के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी अपनी मर्यादा बनाए रखने और अपने कर्तव्यों के प्रति प्रतिबद्ध रहने की आवश्यकता है। आदित्यनाथ ने कहा कि जब कोई विधिवेत्ता इन विचारों को अपने जीवन में उतारता है, तो वह सही दिशा में आगे बढ़ता है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में रामायण मेलों की शुरुआत भी लोहिया ने ही की थी।

