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राजभर का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, बोले समाजवादी पार्टी को ‘एआई-वादी’ बना दीजिए

Om Prakash Rajbhar

लखनऊ: सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने अखिलेश यादव पर एआई से बनाए जा रहे वीडियो को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे सैफई महोत्सव नहीं मना पाने का मलाल वह एआई के जरिए पूरा कर रहे हैं।

राजभर ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि अगर अखिलेश यादव को एआई का इतना ही शौक है तो वह अपनी पार्टी का नाम ‘समाजवादी’ से बदलकर ‘एआई-वादी’ रख लें। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी जिस विचारधारा और सिद्धांतों पर खड़ी हुई थी, उसे एआई वीडियो और सोशल मीडिया की राजनीति तक सीमित कर दिया गया है।

राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी की स्थापना उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव ने जय प्रकाश नारायण, डॉ. राम मनोहर लोहिया, आचार्य नरेंद्र देव, कर्पूरी ठाकुर, चौधरी चरण सिंह और जनेश्वर मिश्रा जैसे नेताओं के सिद्धांतों को आधार बनाकर की थी। उनके मुताबिक, आज उसी पार्टी की राजनीति एआई वीडियो और सोशल मीडिया तक सिमटती दिखाई दे रही है।

सुभासपा अध्यक्ष ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि जिसे कभी ‘धरतीपुत्र’ मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक उत्तराधिकारी कहा जाता था, वह अब एसी कमरे में बैठकर एआई वीडियो बनाकर खुश हो रहा है। उन्होंने कहा कि राजनीति गांव, गरीब और किसान के बीच जाकर तथा जमीन पर पसीना बहाकर होती है, मोबाइल की स्क्रीन पर नाच-गाना करने और एआई रील बनाने से नहीं। राजभर ने यह भी आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछले करीब 10 वर्षों से सत्ता से बाहर हैं और उन्हें जनता के बीच लगातार जाकर संवाद करना चाहिए था।

राजभर ने कहा कि अगर अखिलेश यादव चाहते तो पिछले वर्षों में प्रदेश के अलग-अलग गांवों में जाकर लोगों से मिल सकते थे और उनकी समस्याएं सुन सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बजाय सोशल मीडिया और एसी कमरों की राजनीति पर ज्यादा ध्यान दिया गया। उन्होंने दावा किया कि अब जब राजनीतिक जमीन खिसक रही है तो जनता के बीच जाने के बजाय एआई के जरिए वीडियो बनाकर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोरंजन किया जा रहा है।

राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश का गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और बहुजन समाज अब पुराने राजनीतिक नारों और दावों से प्रभावित होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अति पिछड़ों और बहुजनों को ऐसा नेतृत्व चाहिए जो उनके बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझे और उनके लिए संघर्ष करे।

 

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