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‘व्यास पीठ’ से बहने वाली ज्ञान की धारा ने सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया: CM YOGI

Bada Miyan and Chote Miyan love infiltrators CM Yogi lashes out opposition Kanpur

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रायबरेली: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि मध्यकाल में देश की राजनीतिक कमजोरियों के बावजूद आध्यात्मिक चर्चा के पारंपरिक केंद्र ‘व्यास पीठ’ से बहने वाली ज्ञान की धारा ने सामाजिक एकता को बढ़ावा दिया और भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान को आगे बढ़ाया।

मुख्यमंत्री ने रायबरेली में आयोजित शिव महापुराण कथा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ”हमने धर्म को केवल पूजा-पाठ की विधियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे समाज की जीवन शक्ति के रूप में अपनाया। इसे अपने कर्तव्यों से जोड़ा और राष्ट्र की प्रेरक शक्ति माना।”

उन्होंने कहा, ”यही कारण है कि मध्यकाल में जब राजनीतिक कमजोरियों के कारण विदेशी आक्रांताओं ने भारत के पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाया, तब भी हमारी व्यास पीठों से बहने वाली ज्ञान की धारा ने सामाजिक एकता को मजबूत किया और भारत के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक उत्थान को आगे बढ़ाया।”

आदित्यनाथ ने श्रीरामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें मुगल बादशाह अकबर के दरबार के नवरत्नों में शामिल होने का प्रस्ताव मिला था।उन्होंने कहा, ”जब यह प्रस्ताव तुलसीदास के सामने रखा गया तो उन्होंने पूछा कि अकबर कौन है? लोगों ने बताया कि वह भारत का सम्राट है। इस पर तुलसीदास ने कहा कि मेरा केवल एक ही राजा है और वह राम हैं। राम के अलावा मैं किसी विदेशी अकबर को अपना राजा नहीं मानता।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में तुलसीदास ने यह कहकर अकबर को चुनौती दी थी कि भगवान राम ही उनके एकमात्र राजा हैं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव ने संसार के कल्याण के लिए स्वेच्छा से विषपान किया और वह नकारात्मकता को फैलने से रोकते हैं। आदित्यनाथ ने कहा, ”जब तक भारत में पवित्र कथाओं की गूंज बनी रहेगी, तब तक सनातन धर्म का ध्वज कभी नहीं झुकेगा। और जब तक यह ध्वज ऊंचा लहराता रहेगा, कोई भी भारत को जरा भी नुकसान नहीं पहुंचा पाएगा।”

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