US-Iran Deal Petrol And Diesel Prices Come Down : नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव और बातचीत के दौर के बाद आखिरकार समझौते की राह खुल गई है। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाली इस अहम डील पर दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसमें वैश्विक ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने का प्रावधान भी शामिल है।
समझौते से बाजार में स्थिरता की उम्मीद
इस समझौते से न केवल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आने की उम्मीद है, बल्कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को भी बड़ी राहत मिल सकती है। तेल आपूर्ति पर मंडरा रहा संकट कम होगा, परिवहन लागत घटेगी और महंगाई पर दबाव कम पड़ने से भारतीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। ईरान और ओमान के बीच के इस संकरे जलमार्ग से दुनिया भर में इस्तेमाल होने वाले तेल का लगभग पांचवां हिस्सा सप्लाई होता है और खाड़ी के प्रमुख उत्पादक देशों जैसे सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के लिए निर्यात का मुख्य रास्ता है।
कच्चे तेल की सप्लाई में आ रही थी रुकावट
ये देश हमें ऊर्जा सप्लाई करने वाले हैं। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की वजह से इस स्ट्रेट से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई में रुकावट आई। इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों और एनालिस्ट्स का कहना है कि दोबारा खुलने और तनाव कम होने से ग्लोबल एनर्जी मार्केट में स्थिरता आने और भारत जैसे एनर्जी इम्पोर्ट करने वाले देशों के लिए हालात बेहतर होने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के एलान के बाद रविवार को तेल की कीमतों में गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के साथ युद्धविराम समझौता कर लिया है और होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की टोल-फ्री आवाजाही हो सकेगी।
डोनल्ड ट्रंप ने किया ये पोस्ट
डोनल्ड ट्रंप ने पोस्ट किया कि वे इसके जरिये होर्मुज स्ट्रेट को बिना किसी रोक-टोक के खोलने की पूरी मंजूरी देते हैं और साथ ही अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देते हैं। दुनिया भर के जहाजों अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो। युद्धविराम की खबर से तेल की कीमतों में गिरावट आई। तेल के लिए ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 4 प्रतिशत गिरकर लगभग 84 डॉलर प्रति बैरल हो गई। युद्ध की वजह से आई रुकावटों के बाद ग्लोबल ऑयल की कीमतें फरवरी में 70-72 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं।
देश में दामों में रही कमी-तेजी
इससे पेट्रोल और डीजल बनाने की लागत बढ़ गई, लेकिन सरकार ने मई के मध्य तक रिटेल कीमतों में बदलाव नहीं किया। सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की। विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर लगभग 7.50 रुपये की बढ़ोतरी की गई, जबकि सीएनजी के दाम 6 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए। एलपीजी की कीमतों में भी दो किस्तों में 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर पर 89 रुपये की बढ़ोतरी की गई। कीमतें बढ़ने के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों को रोजाना लगभग 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है क्योंकि रिटेल कीमतें लागत से कम हैं।
Also Read :

