Site icon Dainik Savera Times

उत्तर प्रदेश में बिगड़े हालात: सड़कें, मकान और घाट हुए जलमग्न, 17 जिलों में बाढ़

नेशनल डेस्क: उत्तर भारत में लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने उत्तर प्रदेश को आपदा की स्थिति में ला खड़ा किया है। गंगा और यमुना नदियों के उफान पर आने से प्रदेश के 17 जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। सबसे ज्यादा संकट प्रयागराज में देखने को मिला है, जहां सड़कें, मकान, बाजार और ऐतिहासिक घाट तक पानी में डूब चुके हैं। कई परिवारों को नवजात शिशुओं को गोद में लेकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में निकलना पड़ा।

गंगा-यमुना बनीं तबाही की धाराएं

संगम नगरी प्रयागराज में इस समय गंगा और यमुना नदियों का मिलन बाढ़ का भयावह चेहरा बन चुका है। सलोरी, राजापुर, दारागंज, बघाड़ा, तेलियरगंज जैसे इलाके पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। कई मकान आधे या पूरी तरह डूब गए हैं, और जिन घरों में ऊपरी मंजिल है, वहां लोग जैसे-तैसे टिके हुए हैं।

कभी श्रद्धालुओं से भरे रहने वाले संगम घाट पर अब सन्नाटा पसरा है। बड़ा हनुमान मंदिर पूरी तरह पानी में समा गया है केवल मंदिर की ध्वजा दूर से दिख रही है, जैसे संकट में डूबी आस्था की एक आखिरी झलक हो।

प्रयागराज बना जलसमाधि का दृश्य

शहर के कई प्रमुख घाट और इलाके जैसे किला घाट, शंकर विमान मंडप और कर्जन ब्रिज के आस-पास के क्षेत्र  अब एक जलसमाधि जैसे नज़र आ रहे हैं। यहां पानी इतना भर गया है कि न गली दिखती है, न सड़क। नगर की तस्वीर ऐसी हो गई है कि यह समझना मुश्किल हो गया है कि नदी का किनारा कहां है और रिहायशी इलाका कहां।

एनडीआरएफ की टीमें लगातार राहत और बचाव अभियान चला रही हैं। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है और उन्हें भोजन, दवाइयां और जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

पढ़ाई का हब बना बाढ़ पीड़ित क्षेत्र

तेलियरगंज और सलोरी जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र रहते हैं। अचानक आई इस आपदा ने उनकी दिनचर्या और जीवन पूरी तरह बदल डाला है। किताबें, जरूरी सामान और आशियाने सब कुछ जल में बह गया या खराब हो गया।

यमुना के कहर में डूबते जिले

प्रयागराज के अलावा आगरा, इटावा, औरैया, फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट, कानपुर देहात जैसे यमुना किनारे बसे जिले भी इस समय बाढ़ की चपेट में हैं। फतेहपुर में यमुना की लहरों ने सड़कें निगल ली हैं, बिजली आपूर्ति ठप कर दी गई है और राहत सामग्री की आपूर्ति भी चुनौती बन गई है। बांदा में केन नदी उफान पर है, जिसने यमुना के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र को जलप्रलय में झोंक दिया है।

सरकार सतर्क, राहत कार्य तेज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हालात की गंभीरता को देखते हुए 11 मंत्रियों की टीम गठित की है, जो अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर राहत कार्य की निगरानी कर रहे हैं। प्रयागराज और मिर्जापुर की जिम्मेदारी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ को सौंपी गई है।

Exit mobile version