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Uttar Pradesh में हाईवे का सफर हुआ महंगा, टोल टैक्स की बढ़ीं कीमतें, 6 महीनों में दोगुने हुए रेट

Uttar Pradesh toll tax rates increased 

Uttar Pradesh toll tax rates increased 

हाथरस: मथुरा–बरेली हाईवे पर अचानक बढ़ाए गए टोल टैक्स को लेकर यात्रियों में नाराज़गी तेज़ हो गई है। छह महीने के भीतर ही टोल दरें ढाई गुना तक बढ़ा दी गईं, जिससे रोज़ाना सफर करने वाले लोगों व वृंदावन आने वाले श्रद्धालुओं पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। मई 2025 तक जहां 38 किलोमीटर तक का दोतरफा टोल महज़ 100 रुपये लिया जा रहा था, वहीं अब वही दूरी आगे बढ़ने के बाद कुल 66 किलोमीटर के रूट पर दोतरफा शुल्क 245 रुपये कर दिया गया है।

पहले वाहनपुर–कोयलगाँव तक था 100 रुपये का दोतरफा टोल

हाथरस से वृंदावन जाने वाले यात्री पहले मुरसान–राया मार्ग का उपयोग करते थे, लेकिन राया रेलवे क्रॉसिंग पर लगातार लगने वाले जाम से लोग त्रस्त थे। हाईवे शुरू होने और राया पर ओवरब्रिज बनने के बाद यातायात सुगम हुआ, हालांकि अब बढ़ी हुई टोल दरें नई परेशानी बन गई हैं।

हाईवे को 28 किमी बढ़ाकर मथुरा रिफाइनरी तक जोड़ा गया

मथुरा रिफाइनरी से वाहनपुर तक कुल 66 किलोमीटर लंबे इस हाईवे को दो चरणों में बनाया गया।

पहला चरण: वाहनपुर से कोयलगाँव तक 38 किमी का मार्ग, जिसे मई 2025 में चालू किया गया। उस समय एकतरफा 60 और वापसी पर 40 रुपये लिया जाता था।

दूसरा चरण: कोयलगाँव से राया बाईपास होते हुए मथुरा रिफाइनरी तक 28 किमी का विस्तार, रेल ओवरब्रिज सहित निर्माण पूरा होने के बाद पूरा मार्ग सक्रिय किया गया। अब एनएचएआई द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार एकतरफा यात्रा पर 160 रुपये और दोतरफा पर 245 रुपये वसूले जा रहे हैं।

कम ट्रैफिक से टोल कंपनी भी घाटे में

वर्तमान में टोल संचालन शिवा कॉरपोरेशन के पास है। कंपनी के मैनेजर नितिन शर्मा का कहना है कि हाईवे पर वाहनों का आवागमन अपेक्षाकृत कम है, जिसके कारण हर महीने लाखों का नुकसान हो रहा है। कई वाहन चालक बीच-बीच से गांवों के मार्ग अपनाकर टोल से बच निकलते हैं, जिससे राजस्व प्रभावित होता है। इससे पहले दो कंपनियाँ वंशीलाल गुप्ता एंड कंपनी और उमेश कुमार एंड कंपनी भी घाटे के कारण काम छोड़ चुकी हैं।

पिछले महीने बागेश्वर धाम महाराज की मथुरा यात्रा के दौरान रूट डायवर्जन की वजह से ट्रैफिक बेहद कम रहा, जिससे कंपनी को अतिरिक्त नुकसान झेलना पड़ा। फिलहाल शिवा कॉरपोरेशन तीन महीने की अस्थायी अवधि के लिए यह जिम्मेदारी संभाल रही है।

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स्थानीय लोग कर रहे पुनः समीक्षा की मांग

स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने टोल दरें कम करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि 66 किलोमीटर के लिए 245 रुपये की दर प्रदेश की अन्य हाईवे दरों की तुलना में काफी अधिक है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि एनएचएआई जल्द ही दरों पर पुनर्विचार करेगा।

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