Vice President candidate : भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे ने देश की राजनीतिक फिजाओं में हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा। देश की दूसरी सबसे ऊंची संवैधानिक कुर्सी के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर मंथन जोरों पर है। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे से वापिस आ गए है जिसके बाद अब उम्मीदवार के नाम की घोषणा की जा सकती है।
बीजेपी के पास बहुमत, एनडीए का उम्मीदवार सबसे आगे
लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों वाले निर्वाचक मंडल में एनडीए को स्पष्ट बहुमत हासिल है। दोनों सदनों के कुल 782 सदस्यों में से करीब 425 सांसद NDA के पक्ष में हैं। ऐसे में NDA के प्रत्याशी की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बीजेपी नेतृत्व इस बार भी एक अनुभवी, विचारधारा-समर्पित और राजनीतिक संतुलन साधने वाले चेहरे पर भरोसा जता सकता है।
हरिवंश का नाम चर्चा में, ओबीसी कार्ड पर भी नजर
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा के उपसभापति और जेडीयू सांसद हरिवंश का नाम गंभीरता से लिया जा रहा है। सात वर्षों तक उपसभापति के रूप में संसद की कार्यवाही को सफलतापूर्वक संचालित कर चुके हरिवंश ने सरकार के साथ बेहतर तालमेल बनाए रखा है। सूत्रों की मानें तो NDA सहयोगी दलों के साथ आम सहमति बनाकर इस बार किसी ओबीसी नेता को उम्मीदवार बनाकर सामाजिक संतुलन और आगामी विधानसभा चुनावों को साधने की कोशिश कर सकता है।
राजनीतिक समीकरणों पर टिकी निगाहें
बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम जैसे राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए उपराष्ट्रपति के चयन में क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों की भूमिका अहम मानी जा रही है। बीजेपी चाहती है कि यह नियुक्ति न केवल संसद में सरकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद करे, बल्कि आगामी चुनावों में भी सियासी लाभ पहुंचाए।
चुनाव आयोग की तैयारी शुरू
चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्यसभा के महासचिव को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है, जबकि गरिमा जैन और विजय कुमार को सहायक रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। आयोग जल्द ही चुनाव कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा करेगा। यह चुनाव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 और राष्ट्रपति एवं उपराष्ट्रपति चुनाव अधिनियम, 1952 के तहत संपन्न होगा।
संवैधानिक जिम्मेदारी और राजनीतिक रणनीति का संगम
उपराष्ट्रपति का पद केवल औपचारिक नहीं, बल्कि बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि उपराष्ट्रपति राज्यसभा के सभापति भी होते हैं। ऐसे में इस पद पर बैठने वाला व्यक्ति संसद की मर्यादा, संचालन और सत्तारूढ़ दल के विधायी एजेंडे को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। यही कारण है कि इस चुनाव को लेकर एनडीए अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है।
अब देखना यह होगा कि एनडीए किस नाम पर मुहर लगाता है और क्या यह फैसला आने वाले चुनावों में पार्टी की स्थिति को और मज़बूती देगा या नहीं। फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है और देश एक नए उपराष्ट्रपति के ऐलान की प्रतीक्षा कर रहा है।

