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Waqf Amendment Bill: राज्यसभा में वक्फ बिल पर गरजे सुधांशु त्रिवेदी, बोले- ‘संविधान चलेगा, मजहबी फरमान नहीं’

Waqf Amendment Bill: राज्यसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान गुरुवार को भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी विपक्ष पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को तैयार करने में पूरी गंभीरता से काम किया गया है, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर कुछ लोग गलतफहमी फैला रहे हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा, नया मुल्ला प्याज ज्यादा खाता है, लेकिन यहां तो पुराना मुल्ला ज्यादा माल खा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया वक्फ बोर्ड अलग-अलग क्यों हैं? इतना ही नहीं, ताज महल तक पर वक्फ बोर्ड ने दावा ठोक दिया।

भाजपा नेता ने कहा कि सरकार मुस्लिम समाज के कल्याण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, यह मुकाबला उन लोगों के बीच है जो समाज के विकास में विश्वास रखते हैं और उन लोगों के बीच जो सिर्फ अपना हित साधते हैं। हमारी सरकार गरीब मुस्लिम समाज के साथ है, न कि कट्टरपंथी वोटबैंक की राजनीति करने वालों के साथ।

त्रिवेदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग उम्मा (इस्लामिक वैश्विक समुदाय) की अवधारणा को लेकर भ्रमित हैं और अब उनकी उम्मीदों पर पानी फिर रहा है। उन्होंने कहा, अल्पसंख्यकों की बात करने वाले पहले उसे तौलते हैं और फिर अपने एजेंडे के हिसाब से काम करते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों की मानसिकता पर सवाल उठाया, अगर वे न तो कानून को मानते हैं, न ही नियमों को, और न ही अदालतों के आदेशों को, तो इसका मतलब है कि वे खुद को किसी और ही दुनिया में मानते हैं।

भाजपा सदस्य ने कहा कि सरकार ने जो भी कदम उठाए हैं, वे संविधान के तहत और न्यायसंगत तरीके से लिए गए हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, ब्रिटिश हुकूमत के समय जब मुगलों से सारा हक छीन लिया गया था, तो अब अचानक गुजरात से लेकर लखनऊ तक वक्फ का मालिकाना हक कहां से आ गया? उन्होंने कहा कि सूरत नगर निगम पर भी वक्फ का दावा किया गया है, जो यह दिखाता है कि पुरानी हुकूमतों के फरमान को संविधान से ऊपर रखने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा, जमींदारी उन्मूलन 1948 में हो गया था, फिर ये नए जमींदार कहां से आ गए? 2013 के एक्ट में इस तरह की व्यवस्था कर दी गई कि गरीबों की जमीन लेकर वक्फ को दे दी गई। उन्होंने इसे विनोबा भावे के भूदान आंदोलन की जगह भू हड़प आंदोलन करार दिया।

सुधांशु त्रिवेदी ने उदाहरण देते हुए कहा, क्या किसी ईसाई समुदाय ने कभी कहा कि इंडिया गेट या चर्च गेट उनका है? फिर वक्फ बोर्ड को इतनी विशेष शक्तियां क्यों दी गईं? उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा किए गए संशोधन किसी धार्मिक फरमान के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान के अनुरूप किए गए हैं।

भाजपा नेता ने यह भी सवाल उठाया कि आज़ादी के समय किसी ने वक्फ बोर्ड की मांग नहीं की थी, फिर इसे क्यों और कैसे स्थापित किया गया? उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को मुख्यधारा में आने से कोई रोक नहीं सकता, लेकिन कुछ लोग इसे अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, हमारा देश बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान से चलेगा, किसी मजहबी फरमान से नहीं। उनका मानना है कि सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अधिकार देना है, न कि किसी विशेष समूह को अनुचित लाभ पहुंचाना है।

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