नेशनल डेस्क: गुजरात के सूरत जिले में एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लोगों के घरों तक पानी पहुंचने से पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी गिरकर पूरी तरह ध्वस्त हो गई। यह हादसा उस वक्त हुआ, जब टंकी में गुणवत्ता जांच के लिए पानी भरा जा रहा था। इस घटना के बाद निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जनता के टैक्स से बना यह प्रोजेक्ट लोगों तक पानी पहुंचाने से पहले ही बर्बाद हो गया।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला सूरत के अरेठ तालुका स्थित ताड़केश्वर गांव का है। यहां पिछले तीन वर्षों से ‘गाय पगला ग्रुप वॉटर सप्लाई स्कीम’ के तहत पानी की टंकी और पाइपलाइन सिस्टम का निर्माण चल रहा था। इस योजना का मकसद आसपास के करीब 14 गांवों को पीने का साफ पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन टंकी गिरने से यह सपना अधूरा रह गया।
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बताया जा रहा है कि पानी की यह टंकी लगभग बनकर तैयार हो चुकी थी। इसकी कुल क्षमता 11 लाख लीटर थी और टेस्टिंग के लिए इसमें करीब 9 लाख लीटर पानी भरा गया था। मंगलवार सुबह करीब 12 बजे अचानक पूरी टंकी भरभराकर गिर गई। गनीमत रही कि हादसे के समय वहां कोई मौजूद नहीं था, जिससे किसी की जान नहीं गई और एक बड़ा हादसा टल गया।
टंकी गिरने के बाद पूरे इलाके में मलबा और पानी फैला नजर आया। सरकार की ओर से इस परियोजना के लिए लगभग 21 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई थी, जिसमें 15 मीटर ऊंची पानी की टंकी और एक तालाब का निर्माण शामिल था। हालांकि बताया जा रहा है कि पानी का तालाब कुछ दूरी पर बनाया गया था, जिससे उसे पहले से ही नुकसान हो रहा था।
घटना के दौरान जब टंकी में पानी भरा जा रहा था, तब दीवारों से पपड़ी निकलती हुई देखी गई। इससे निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने का शक और गहरा गया है। हादसे की खबर मिलते ही गांव के लोग मौके पर पहुंच गए और ठेकेदार तथा संबंधित एजेंसियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाने लगे। लोगों का कहना है कि अगर टंकी का निर्माण सही तरीके से किया गया होता, तो यह हादसा नहीं होता। ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना से 14 गांवों को पीने का पानी मिलना था, लेकिन अब उन्हें यह नहीं पता कि नई टंकी कब बनेगी और उनके घरों तक पानी कब पहुंचेगा। लोगों में इस घटना को लेकर गहरा रोष और निराशा देखी जा रही है।
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घटना के बाद जल आपूर्ति विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस टंकी का निर्माण एक सुपर एजेंसी द्वारा कराया गया था। अब इस पूरे मामले की जांच SVNIT के एक इंजीनियर से कराई जाएगी, जो अपनी रिपोर्ट वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट को सौंपेगा, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि टंकी गिरने की असली वजह क्या थी और इसमें किसी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं।