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संगठन में फेरबदल : तृणमूल कांग्रेस के युवा अध्यक्ष पद से सायनी घोष की छुट्टी

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West Bengal Sayani Ghosh Removed Youth President : कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस ने संगठन में बड़ा फेरबदल करते हुए कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। पार्टी नेतृत्व ने उत्तर कोलकाता जिला अध्यक्ष पद से वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय को हटाकर बेलियाघाटा के विधायक कुणाल घोष को नई जिम्मेदारी सौंपी है।

बागी खेमें में जाने की थी सूचना

युवा तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष पद से अभिनेत्री-राजनेता सायनी घोष की भी छुट्टी कर दी है। इन बदलावों को पार्टी के भीतर संगठन को मजबूत करने और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। सयानी घोष के पिछले दिनों बागी खेमे में जाने की सूचना आ रही है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने शनिवार को सांसद सायोनी घोष को पार्टी की युवा इकाई के अध्यक्ष पद से हटा दिया और उनकी जगह युवा नेता अर्णब बनर्जी को नियुक्त किया गया है।

चुनाव हारने के बाद चल रहा गतिरोध

यदि बात करें सूत्रों की तो पार्टी ने महिला संगठन तृणमूल महिला कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर भी बदलाव किया है। कोलकाता दक्षिण से सांसद माला राय की जगह नदिया जिले के कालिगंज से विधायक अलीफा अहमद को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। सायोनी घोष और माला राय दोनों को उन तृणमूल सांसदों के उस समूह का हिस्सा माना जा रहा है, जिन्होंने हाल के दिनों में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। पार्टी में चल रही उथल-पुथल के बीच बागी सांसदों ने घोषणा की है कि वे सोमवार को ओम बिरला से मुलाकात कर एक पत्र सौंपेंगे, जिसमें उन्हें ‘वास्तविक तृणमूल’ के रूप में मान्यता देने की मांग की जाएगी। यह घटनाक्रम 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद सामने आया है।

अभिषेक बनर्जी की भूमिका पर बहस

यहां ये भी उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) इस समय अपने इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी को न केवल विपक्ष की भूमिका निभानी पड़ रही है, बल्कि अंदरूनी असंतोष और नेतृत्व संकट का भी सामना करना पड़ रहा है। टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद सामने आए हैं। चुनावी हार के बाद कुछ नेताओं ने संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं। हाल के फेरबदल को भी कई राजनीतिक विश्लेषक शक्ति-संतुलन की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। टीएमसी के कई नेताओं के खिलाफ चल रही जांचें भी पार्टी के लिए चुनौती बनी हुई हैं। हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी और कुणाल घोष से पूछताछ हो रही है, जबकि अन्य मामलों में भी जांच एजेंसियां सक्रिय हैं।

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