Western disturbance changes weather : अंबाला। प्रदेश में पश्चिमी विक्षोभ और सक्रिय टर्फ के प्रभाव से एनसीआर और दिल्ली क्षेत्र में मौसम लगातार परिवर्तनशील है। सुबह प्रदेश के सिरसा, फतेहाबाद, सोनीपत, रोहतक तथा एनसीआर दिल्ली के कई क्षेत्रों में तेज आंधी, अंधड़ और हल्की बारिश और बूंदाबांदी दर्ज की गई।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी कुछ घंटों के दौरान प्रदेश के कई जिलों में मौसम खराब रहने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले एक से तीन घंटों के दौरान जींद, रोहतक, झज्जर, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी एवं गुरुग्राम जिलों में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश, बूंदाबांदी तथा कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है। मौसम में आए इस बदलाव से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और लोगों को गर्मी से राहत मिली है।
17 जून तक बदलता रहेगा मौसम
राजकीय महाविद्यालय के पर्यावरण क्लब के नोडल अधिकारी प्रोफेसर डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने के कारण 15 से 17 जून तक प्रदेश में मौसम लगातार परिवर्तनशील बना रहेगा। इस दौरान बीच-बीच में तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। कृषि कार्यों को लेकर किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने कहा है कि किसान 15 से 17 जून तक फसलों की बिजाई का कार्य फिलहाल टाल दें, क्योंकि मौसम की खराब परिस्थितियां कृषि कार्यों को प्रभावित कर सकती हैं।
बारिश से गर्मी से मिली राहत
प्रदेश के कई क्षेत्रों में सुबह हुई बूंदाबांदी एवं तेज हवाओं के कारण लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने नागरिकों से खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने तथा खुले स्थानों एवं पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की अपील की है।
17 जून के बाद करवट लेगा मौसम
17 जून के बाद हरियाणा में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग और हालिया पूर्वानुमानों के अनुसार 17 जून तक राज्य के कई हिस्सों में आंधी, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। इसके बाद बारिश की गतिविधियों में कमी आने और उमस बढ़ने की संभावना है।
- दिन के तापमान में 2-4°C तक बढ़ोतरी हो सकती है।
- कई जिलों में अधिकतम तापमान 38-42°C के बीच पहुंच सकता है।
- नमी बढ़ने से उमस भरी गर्मी महसूस होगी।
- दोपहर और शाम के समय कहीं-कहीं स्थानीय स्तर पर गरज-चमक या हल्की बारिश से इनकार नहीं किया जा सकता।
- मानसून की आगे की प्रगति पर मौसम का रुख निर्भर करेगा।
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