
White house: व्हाइट हाउस ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच ईरान संकट को लेकर हुई बातचीत की तारीफ की। हालांकि, इस बात की पुष्टि नहीं की गई कि इस बातचीत में एलन मस्क भी शामिल थे या नहीं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं और यह बातचीत उपयोगी रही।”
ट्रंप और मस्क के रिश्तों में सुधार!
उन्होंने यह बात उस खबर के जवाब में कही, जिसमें दावा किया गया था कि दोनों नेताओं की बातचीत में एलन मस्क भी शामिल हुए थे। व्हाइट हाउस ने न्यूयॉर्क टाइम्स की इस रिपोर्ट की न तो पुष्टि की और न ही खंडन किया। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि दो अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस बातचीत में मस्क की मौजूदगी से संकेत मिलता है कि दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच रिश्ते फिर से बेहतर हो रहे हैं।
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पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर हुई चर्चा
अखबार ने आगे कहा, “पिछले साल गर्मियों में दोनों के बीच तब खटास आ गई थी, जब मस्क ने सरकार में अपना पद छोड़ दिया था। उन्हें सरकार में कर्मचारियों की संख्या कम करने का काम सौंपा गया था। ऐसा लगता है कि हाल के महीनों में दोनों के बीच सब कुछ ठीक हो गया है।” खबरों के मुताबिक, इस बातचीत में पश्चिम एशिया की बिगड़ती स्थिति पर चर्चा हुई, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर। यह एक अहम समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल की आपूर्ति होती है। हाल के दिनों में ईरान से जुड़े घटनाक्रम और समुद्री आवाजाही में रुकावट की आशंका के कारण तनाव बढ़ा है।
शांति और स्थिरता बनाए रखने पर बनी सहमति
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर कहा कि इस समुद्री मार्ग का खुला, सुरक्षित और सुचारु रहना पूरी दुनिया के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा, “हम इस मुद्दे पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों के लिए संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं।”
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एलन मस्क का शामिल होना असामान्य
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एक निजी कारोबारी होने के बावजूद एलन मस्क का इस बातचीत में शामिल होना असामान्य है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि उन्हें क्यों जोड़ा गया या उन्होंने बातचीत में हिस्सा लिया या नहीं। यह चर्चा ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज स्ट्रेट को बंद किए जाने की आशंका बढ़ रही है। इस रास्ते से दुनिया के तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, खासकर उन देशों पर जो तेल आयात करते हैं।
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