Last Updated: October 20, 2026

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पैर गंवाने वाली महिला को मिलेगा 2.55 करोड़ मुआवजा

October 20, 2026

पैर गंवाने वाली महिला को मिलेगा 2.55 करोड़ मुआवजा

Woman Who Lost Leg in Road Accident Awarded ₹2.55 Crore : नई दिल्ली। सड़क हादसे में बायां पैर गंवाने वाली 26 वर्षीय महिला रीना को मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने 2.55 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है।

5 नवंबर 2024 को पीरागढ़ी चौक पर ट्रक की टक्कर में महिला का पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा था। अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर मुआवजा जमा करने का निर्देश दिया।

यह दुर्घटना 5 नवंबर 2024 को राजधानी के व्यस्त पीरागढ़ी चौक पर हुई थी। पीड़िता रीना अपने दो साल के मासूम बेटे के साथ स्कूटर पर पीछे बैठी थी। इसी दौरान तेज रफ्तार और लापरवाही से आ रहे एक ट्रक ने उनके स्कूटर को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयानक थी कि ट्रक का पहिया रीना के बाएं पैर के ऊपर से गुजर गया, जिससे उनका पैर बुरी तरह कुचल गया। इस जानलेवा हादसे के बाद उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी जान बचाने के लिए तीन बार सर्जरी करनी पड़ी और अंततः उनका बायां पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा।

सुनवाई के दौरान ट्रक की बीमा कंपनी ने मुआवजे से बचने के लिए कई तरह के तर्क दिए। कंपनी ने दावा किया कि गलती स्कूटर चालक की थी और दोनों महिलाओं ने हेलमेट नहीं पहना था। हालांकि, न्यायाधिकरण ने बीमा कंपनी के इन सभी तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि रीना द्वारा लापरवाही से गाड़ी चलाने और दुर्घटना के संबंध में दी गई गवाही पूरी तरह से अकाट्य और विश्वसनीय थी। इसके अलावा, ट्रक के मालिक सह-चालक महिंदर सिंह अदालत में पेश नहीं हुए, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष भी लिया।

रीना एक युवा उद्यमी थीं और हादसे के वक्त उनके तीन छोटे बच्चे (दो से चार वर्ष की आयु के) थे। इस दुर्घटना के कारण उन्हें अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को पूरी तरह बंद करना पड़ा। न्यायाधिकरण ने इस बात पर गौर किया कि भले ही शारीरिक विकलांगता कम आंकी गई हो, लेकिन इस प्रकार की गंभीर चोट के बाद पीड़िता का जीवन पूरी तरह बदल चुका है। अदालत ने कहा, ‘इस विकलांगता और इसके कारण उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों के साथ, जिसमें सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है, याचिकाकर्ता उस तरह का जीवन नहीं जी पाएगी जैसा वह दुर्घटना से पहले जीती थी।’ सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का हवाला देते हुए अदालत ने एक गृहिणी के रूप में उनके योगदान के लिए 6,000 रुपये प्रति माह जोड़ते हुए उनकी कुल मासिक आय 58,915 रुपये तय की।

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